नए चेयरमैन की नियुक्ति के बाद एचडीएफसी बैंक के शेयरों में गिरावट, सीईओ की नियुक्ति प्रक्रिया अभी बाकी


नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। देश के सबसे बड़े निजी बैंक एचडीएफसी बैंक के शेयर मंगलवार को शुरुआती कारोबार में गिरावट के साथ कारोबार करते दिखाई दिए। बैंक द्वारा पूर्व वित्त सचिव राजीव कुमार को तीन साल के लिए नया पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किए जाने के बाद निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया।

शुरुआती कारोबार में बीएसई पर एचडीएफसी बैंक के शेयर 0.62 प्रतिशत गिरकर 794 रुपए के इंट्रा-डे लो पर पहुंच गए। वहीं खबर लिखे जाने तक कंपनी के शेयर 0.29 प्रतिशत की गिरावट के साथ 796.65 रुपए पर कारोबार करते नजर आए।

बैंक ने सोमवार को शेयर बाजार को दी गई जानकारी में बताया था कि राजीव कुमार को पार्ट-टाइम चेयरमैन नियुक्त किया गया है।

उन्होंने अतानु चक्रवर्ती की जगह ली है, जिन्होंने इस साल की शुरुआत में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इस्तीफा देते समय उन्होंने कहा था कि बैंक में कुछ ऐसी कार्यप्रणालियां थीं, जो उनके व्यक्तिगत मूल्यों और नैतिक सिद्धांतों के अनुरूप नहीं थीं।

मार्च में अतानु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद बैंक के कामकाज में निरंतरता बनाए रखने के लिए केकी मिस्त्री को अंतरिम पार्ट-टाइम चेयरमैन बनाया गया था। अब राजीव कुमार की नियुक्ति के साथ बैंक को तीन साल के लिए स्थायी चेयरमैन मिल गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार को हुई गवर्नेंस, नॉमिनेशन एंड रेम्यूनरेशन कमेटी (एनआरसी) की बैठक में बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की दोबारा नियुक्ति पर कोई चर्चा नहीं हुई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, बैंक जल्द ही सीईओ की पुनर्नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करेगा। बैंक चाहता है कि इस प्रक्रिया से पहले स्थायी चेयरमैन पूरी तरह पदभार संभाल लें।

बीएसई के आंकड़ों के अनुसार, एचडीएफसी बैंक के शेयर ने पिछले 52 हफ्तों में 1,020.35 रुपए का उच्चतम स्तर और 726.75 रुपए का न्यूनतम स्तर छुआ है।

पिछले एक वर्ष में बैंक का शेयर 20 प्रतिशत से अधिक गिरा है। वहीं, पिछले छह महीनों में भी इसमें करीब 20 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।

इस बीच, एनडीटीवी प्रॉफिट की एक रिपोर्ट के अनुसार, पूर्व चेयरमैन अतानु चक्रवर्ती ने अपने इस्तीफे से जुड़े कानूनी समीक्षा पर भी सवाल उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि यह समीक्षा जरूरत से ज्यादा औपचारिक थी और इसमें मुख्य रूप से नियमों के पालन पर जोर दिया गया, जबकि उन्होंने बैंक की कुछ कारोबारी कार्यप्रणालियों को लेकर जो व्यापक चिंताएं जताई थीं, उन पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।

–आईएएनएस

डीबीपी


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