सरकार ने जनवरी-जून तक 1,331 कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी किएः मुरलीधर मोहोल


नई दिल्ली, 21 जुलाई (आईएएनएस)। भारत ने 2026 के पहले छह महीनों (जनवरी-जून) में 1,331 कमर्शियल पायलट लाइसेंस (सीपीएल) जारी किए। नए लाइसेंस पाने वाले हर 10 में से चार से अधिक पायलटों ने विदेश में ट्रेनिंग ली है।

राज्यसभा में एक लिखित जवाब में केंद्रीय सहकारिता और नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री मुरलीधर मोहोल ने बताया कि 30 जून तक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने भारतीय फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन में ट्रेनिंग लेने वाले 791 कैडेट्स और विदेश में ट्रेनिंग लेने वाले 540 कैडेट्स को लाइसेंस जारी किए हैं।

इससे पता चलता है कि नए लाइसेंस पाने वाले कमर्शियल पायलटों में से लगभग 41 प्रतिशत ने विदेश में ट्रेनिंग ली थी। ये आंकड़े ऐसे समय में आए हैं, जब भारतीय एयरलाइंस अपने बेड़े और नेटवर्क का विस्तार कर रही हैं, जिससे पायलटों की जबरदस्त मांग बढ़ रही है।

मंत्री के अनुसार, डीजीसी ने 2022 में 1,165, 2023 में 1,622 और 2024 में 1,347 कमर्शियल पायलट लाइसेंस जारी किए थे, जबकि 2025 में यह संख्या 1,652 रही। इससे पता चलता है कि पिछले कुछ वर्षों में पायलट सर्टिफिकेशन में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

मंत्री ने बताया कि भारत में अभी डीजीसीए से मंजूरी प्राप्त 41 फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन काम कर रहे हैं। ये 63 बेस पर फैले हुए हैं और इनके पास 400 से अधिक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट का बेड़ा है।

डीजीसीए के नियमों के तहत, फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन के लिए एयरक्राफ्ट-इंस्ट्रक्टर-स्टूडेंट का अनुपात 1:1:10 बनाए रखना जरूरी है। इससे मौजूदा ट्रेनिंग सिस्टम में किसी भी समय लगभग 3,500 स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग दी जा सकती है।

मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार ने देश के पायलट ट्रेनिंग सिस्टम को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन के लिए मंजूरी और निगरानी की प्रक्रिया को आसान बनाना, और क्षमता व ऑपरेशनल दक्षता को बेहतर बनाने के लिए ट्रेनिंग नियमों में बदलाव करना शामिल है।

यह ताजा डेटा भारत के एविएशन सेक्टर में ज़बरदस्त बढ़ोतरी के बीच आया है। घरेलू एयरलाइंस बड़े पैमाने पर विमानों के ऑर्डर दे रही हैं और अपना कामकाज बढ़ा रही हैं, जिससे आने वाले सालों में हजारों और पायलटों की जरूरत पैदा हो रही है।

–आईएएनएस

ओपी/पीएम


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