कैंसर और मधुमेह के खिलाफ लड़ाई में जन आंदोलन की जरूरत: डॉ. जितेंद्र सिंह


नई दिल्ली, 19 जुलाई (आईएएनएस)। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने रविवार को कैंसर, मधुमेह, मोटापा और अन्य गैर-संक्रामक रोगों के खिलाफ राष्ट्रव्यापी जन आंदोलन का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवनशैली संबंधी विकारों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए भारत की प्रतिक्रिया अस्पतालों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि एक जन आंदोलन के रूप में विकसित होनी चाहिए जो रोकथाम, शीघ्र निदान और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित हो।

मंत्री विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के पूर्व वरिष्ठ सलाहकार डॉ. अखिलेश गुप्ता द्वारा लिखित पुस्तक ‘अनब्रोकन: माय बैटल विद कैंसर एंड द विल टू लीड’ के विमोचन के अवसर पर बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि देश न केवल गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ का सामना कर रहा है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं की बढ़ती चुनौती से भी जूझ रहा है।

उन्होंने कहा कि कैंसर, मधुमेह, मोटापा और अन्य गैर-संक्रामक रोगों के बढ़ते बोझ से निपटने के लिए भारत को अस्पतालों तक सीमित न रहकर एक जन आंदोलन चलाना होगा, जो शीघ्र निदान, सही चिकित्सा सलाह और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य सेवा पर केंद्रित हो।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक संचार और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा सलाह पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि देश आज न केवल जागरूकता की कमी का सामना कर रहा है, बल्कि व्यापक स्वास्थ्य संबंधी गलत सूचनाओं की चुनौती का भी सामना कर रहा है, जिससे विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए वैज्ञानिक संचार और साक्ष्य-आधारित स्वास्थ्य संचार पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं।

मंत्री ने कहा कि कैंसर, मधुमेह, मोटापा, फैटी लिवर रोग और अन्य चयापचय संबंधी विकार भारत की कुछ सबसे बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों के रूप में उभर रहे हैं और युवा आयु वर्ग को तेजी से प्रभावित कर रहे हैं।

उन्होंने समझाया कि कई कैंसरों का अगर जल्दी पता चल जाए तो उनका इलाज या नियंत्रण संभव है, इसलिए समय पर जांच और तुरंत चिकित्सा हस्तक्षेप से जीवित रहने की दर में सुधार के लिए बेहद जरूरी है।

बढ़ते मोटापे और अस्वस्थ जीवनशैली पर चिंता व्यक्त करते हुए मंत्री ने कहा कि निवारक स्वास्थ्य देखभाल को व्यक्तिगत पसंद के बजाय राष्ट्रीय आदत बनानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि अगर भारत को जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते बोझ को कम करना है, तो संतुलित पोषण, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को रोजमर्रा की जिंदगी का अभिन्न अंग बनाना होगा।

–आईएएनएस

एमएस/


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