पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया गया विकास ही आगे बढ़ने का एकमात्र सुरक्षित रास्ता है : आदर्श गौरव

मुंबई, 1 जून (आईएएनएस)। अभिनेता आदर्श गौरव आगामी डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘वॉइसेस ऑफ द लैंड’ में नजर आएंगे। यह सीरीज पूर्वोत्तर भारत के समुदायों की संस्कृति, संगीत और पारंपरिक मौखिक इतिहास को करीब से दिखाएगी। अभिनेता ने आईएएनएस के साथ बातचीत में बताया कि उन्हें शूटिंग के दौरान नॉर्थ-ईस्ट के आदिवासियों के साथ समय बिताने, उनके इतिहास को जानने, भाषाओं और अनमोल परंपराओं को समझने का मौका मिला।
उन्होंने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया, “ये ऐसे गहरे अनुभव हैं, जिसका मौका हर किसी को नहीं मिलता। एक आम टूरिस्ट को शायद कभी भी वैसी पहुंच और समझ न मिल पाए, जैसी मुझे मिली।”
आदर्श ने बताया, “मेरे जहन में, जो बात सबसे ज्यादा रही, वह यह थी कि विपरीत परिस्थितियों में भी जिंदगी के प्रति उनका प्यार और सम्मान। माजुली में शूटिंग के दौरान हमारे लोकल गाइड ने बताया कि हर साल यहां मानसून के महीनों में ब्रह्मपुत्र नदी का पानी इतना बढ़ जाता है कि भयंकर बाढ़ आ जाती है। पानी लोगों के घरों में पहुंच जाता है और वे जमीन पर पैर तक नहीं रख पाते।”
उन्होंने आगे कहा, “इतना ही नहीं वे रोजमर्रा के कामों के लिए नावों का उपयोग करते हैं। उनकी जिंदगी यकीनन मुश्किलों भरी है। जिंदगी की इन मुश्किलों के बावजूद, उनकी सकारात्मकता, लोगों के बारे में जानने की उत्सुकता, और अजनबियों के प्रति उनका अपनापन कमाल का है। ये कुछ ऐसी बाते हैं, जिन्हें हम में से कई लोग अक्सर भूल जाते हैं। उनके साथ बिताया गया हर दिन कुछ न कुछ सीखने का अनुभव था।”
अभिनेता आदर्श गौरव ने बताया कि आदिवासियों के पास शहरों में रहने वाले लोगों के मुकाबले प्रकृति को लेकर ज्यादा ज्ञान है। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि जंगलों, पेड़-पौधों और प्राकृतिक दुनिया को लेकर हमारे आदिवासियों के पास जो पारंपरिक और व्यावहारिक ज्ञान है, वह शहरों में रहने वाले लोगों में लुप्त होते जा रहे हैं। हमारे पूर्वजों को प्रकृति की बहुत गहरी समझ थी। उन्हें इस बात का ज्ञान होता था कि किस खास पौधे की पत्ती का इस्तेमाल करके त्वचा या शरीर संबंधी बीमारियों का इलाज किया जा सकता है। इस तरह के पारंपरिक ज्ञान के अनगिनत उदाहरण हैं।”
उन्होंने चिंता जाहिर करते हुए बताया कि हम लोग पर्यावरण से कट चुके हैं। मुझे लगता है कि हमें इन समुदायों से सीखना और समझना होगा कि प्रकृति के साथ तालमेल भरा रिश्ता कैसे बनाकर रखना चाहिए। विकास जरूरी है, लेकिन सोच-समझकर और पर्यावरण को ध्यान में रखकर किया गया विकास ही आगे बढ़ने का एकमात्र सही और सुरक्षित रास्ता है। हमें अपनी हरियाली का सम्मान करना होगा।
–आईएएनएस
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