वर्ष 2029 तक एआई से निकाले गए निष्कर्ष बनेंगे निजता के लिए सबसे बड़ा खतरा, डेटा चोरी से भी अधिक बढ़ेगा जोखिम: रिपोर्ट


नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। वर्ष 2029 तक अधिकांश निजता (प्राइवेसी) से जुड़ी घटनाएं सीधे व्यक्तिगत पहचान योग्य जानकारी (पीआईआई) की चोरी या लीक होने के बजाय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) द्वारा लोगों के बारे में निकाले गए निष्कर्षों (एआई-जेनरेटेड इन्फ्रेंसेज) के कारण होंगी। यह जानकारी रिसर्च एवं एडवाइजरी फर्म गार्टनर की एक नई रिपोर्ट में सामने आई है।

रिपोर्ट के अनुसार, जेनरेटिव एआई और मशीन लर्निंग में तेजी से हो रही प्रगति के कारण साइबर हमलावर अब सामान्य, अनाम या एकत्रित डेटा से भी किसी व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, व्यवहार संबंधी पैटर्न और अन्य संवेदनशील जानकारियों का अनुमान लगाने में सक्षम हो रहे हैं। यानी, भले ही किसी व्यक्ति का निजी डेटा सीधे लीक न हुआ हो, एआई उसके बारे में कई अहम निष्कर्ष निकाल सकता है।

गार्टनर के वाइस प्रेसिडेंट एनालिस्ट बार्ट विलेमसन ने कहा कि दुनिया अब डेटा एक्सपोजर से इनसाइट एक्सपोजर की ओर बढ़ रही है।

अब तक कंपनियां मुख्य रूप से व्यक्तिगत डेटा को सुरक्षित रखने पर ध्यान देती थीं, लेकिन एआई बिना पारंपरिक सुरक्षा तंत्र को तोड़े भी लोगों के बारे में बेहद निजी जानकारियों का अनुमान लगा सकता है।

ऐसे में भविष्य में निजता से जुड़े जोखिम इस बात से अधिक पैदा होंगे कि एआई किसी व्यक्ति के बारे में क्या निष्कर्ष निकालता है, न कि केवल कौन-सा डेटा सार्वजनिक हुआ है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि इनफरेंस अटैक विशेष रूप से खतरनाक होते हैं, क्योंकि इन्हें पारंपरिक साइबर सुरक्षा प्रणालियों से पहचानना बेहद मुश्किल होता है।

ऐसे मामलों में किसी व्यक्ति का डेटा लीक नहीं होता, बल्कि एआई उसके बारे में ऐसे निष्कर्ष तैयार कर देता है जो उसकी निजता और डेटा की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकते हैं, जिन्हें समझना, पहचानना और रोकना भी काफी चुनौतीपूर्ण होता है।

गार्टनर का अनुमान है कि 2028 तक कंपनियां डेटा की गोपनीयता पर जितना खर्च करेंगी, लगभग उतना ही निवेश डेटा की अखंडता सुनिश्चित करने पर भी करेंगी। इसका कारण एआई द्वारा तैयार की गई गलत, पक्षपातपूर्ण या अनधिकृत प्रोफाइल से बढ़ता जोखिम होगा।

रिपोर्ट में कहा गया है कि जो संस्थाएं अभी भी निजता को केवल डेटा सुरक्षा का विषय मानकर चल रही हैं, वे आने वाले वर्षों में एआई आधारित इनफरेंस से जुड़े जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील होंगी।

इसलिए कंपनियों को अपनी प्राइवेसी रणनीति में एआई गवर्नेंस को शामिल करना चाहिए और डिफरेंशियल प्राइवेसी, सिंथेटिक डेटा जैसी प्राइवेसी बढ़ाने वाली तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ डेटा संग्रह को न्यूनतम रखने, सख्त एक्सेस कंट्रोल लागू करने और समय पर डेटा हटाने जैसी प्रक्रियाओं को मजबूत करना चाहिए, ताकि एआई-आधारित अनुमान लगाने वाले हमलों की संभावना कम की जा सके।

–आईएएनएस

डीबीपी


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