पीओके के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी को लेकर चिंता, हालात पर उठे सवाल


इस्लामाबाद, 8 जून (आईएएनएस)। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के रावलकोट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई कथित गोलीबारी को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आई हैं। यूनाइटेड कश्मीर पीपल्स नेशनल पार्टी ने सोमवार को इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे “नरसंहार” करार दिया।

यूकेपीएनपी के अनुसार, रविवार रात हुई इस घटना में कई प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए। संगठन ने कहा कि शांतिपूर्ण और निहत्थे लोगों पर बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

पार्टी ने बयान में कहा, “शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक अधिकार है। पाकिस्तान को निहत्थे कश्मीरियों के खिलाफ अत्याचार और दमन का यह सिलसिला तुरंत बंद करना चाहिए।”

संगठन ने संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप कर कश्मीरी लोगों के जीवन और उनके मौलिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मीडिया और मानवाधिकार संगठनों से पीओके की जमीनी स्थिति को दुनिया के सामने लाने की अपील की है।

रिपोर्टों के अनुसार, रावलकोट इस समय पीओके में फैल रहे विरोध प्रदर्शनों का केंद्र बन गया है। यह विरोध तब तेज हुआ जब प्रशासन ने जम्मू-कश्मीर संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी से जुड़े कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।

बताया गया है कि प्रशासन ने जेएंडकेजेएएसी को प्रतिबंधित संगठन घोषित कर दिया है और 9 जून को प्रस्तावित “लॉन्ग मार्च” से पहले कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। आंदोलन से जुड़े नेताओं का आरोप है कि 5 जून की रात से पूरे पीओके में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं, जिससे संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।

स्थानीय कार्यकर्ताओं के हवाले से आई रिपोर्टों में कहा गया है कि आंदोलन के दौरान जेएंडकेजेएएसी के सदस्य शाहजेब हबीब और अमजद कश्मीरी की मौत हो गई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सुरक्षा बलों ने शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किया।

रिपोर्टों के अनुसार, विरोध प्रदर्शन अब केवल रावलाकोट तक सीमित नहीं है। मुज़फ़्फ़राबाद, मीरपुर, टाटा पानी और प्लांदरी समेत कई क्षेत्रों में प्रदर्शन और बंद का आह्वान किया गया है। प्लांदरी में प्रदर्शनकारियों द्वारा प्रमुख मार्गों को अवरुद्ध किए जाने की भी खबर है।

पीओके में बिगड़ते हालात को लेकर विदेशों में रहने वाले कश्मीरी समुदाय ने भी चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यूनाइटेड किंगडम में एकजुटता प्रदर्शन आयोजित किए गए हैं, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर क्षेत्र में मानवाधिकारों की स्थिति का मुद्दा उठाया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि 9 जून के प्रस्तावित लॉन्ग मार्च और बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए आने वाले दिन बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। रावलाकोट में जारी तनाव और व्यापक विरोध प्रदर्शनों के कारण पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की स्थिति क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक ध्यान आकर्षित कर सकती है।

–आईएएनएस

डीएससी


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