न शॉवर, न हेयर ड्रायर … स्पेस में कैसे करते हैं हेयरवॉश, एस्ट्रोनॉट सोफी अडेंनॉट ने बताया पूरा तरीका


नई दिल्ली, 4 जून (आईएएनएस)। स्पेस की लाइफ पृथ्वी से काफी अलग होती है। वहां रोजमर्रा के साधारण काम भी विशेष तरीके से करने पड़ते हैं। यूरोपीय स्पेस एजेंसी (ईएसए) की एस्ट्रोनॉट सोफी अडेंनॉट ने हाल ही में बताया कि स्पेस में हेयरवॉश कैसे किया जाता है और इसके लिए किन खास तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है।

सोफी अडेंनॉट ने इंस्टाग्राम पर अपने अनुभव को साझा करते हुए बताया कि पहली नजर में स्पेस में हेयरवॉश की प्रक्रिया पृथ्वी जैसी ही लग सकती है। पानी लगाना, शैम्पू करना और बालों को सुखाना- ये सभी चरण समान हैं। लेकिन माइक्रोग्रैविटी यानी बेहद कम गुरुत्वाकर्षण वाले वातावरण में यह प्रक्रिया पूरी तरह अलग अनुभव बन जाती है।

उन्होंने बताया कि बाल धोने की शुरुआत हेयरब्रश से बालों को सुलझाने से होती है। इसके बाद एक छोटे पानी के बैग की मदद से बालों और सिर की त्वचा पर थोड़ा-थोड़ा पानी लगाया जाता है। पानी को पूरे सिर में फैलाने के लिए अच्छी तरह मालिश की जाती है ताकि हर हिस्से तक नमी पहुंच सके।

सोफी ने बताया कि एस्ट्रोनॉट्स के लिए विशेष प्रकार का ‘नो-रिंस’ शैम्पू उपलब्ध कराया जाता है। इस शैम्पू को इस्तेमाल करने के बाद अधिक पानी से धोने की जरूरत नहीं पड़ती। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें एक विशेष साबुन की टिकिया का उपयोग करना पसंद है, जिससे उन्हें अतिरिक्त सफाई का एहसास होता है। वह साबुन और शैम्पू को बालों की जड़ों तक अच्छी तरह पहुंचाने के लिए मालिश करती हैं।

बाल साफ करने के बाद तौलिए की मदद से अतिरिक्त शैम्पू और नमी को सोख लिया जाता है। इसके लिए बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है। सोफी के अनुसार, लगभग 250 मिलीलीटर पानी से पूरे बाल धोए जा सकते हैं, जो पृथ्वी पर इस्तेमाल होने वाले पानी की तुलना में काफी कम है।

उन्होंने बताया कि इस्तेमाल किए गए तौलिए को बाद में सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। तौलिए में मौजूद नमी को अंतरिक्ष स्टेशन की जल पुनर्चक्रण प्रणाली के जरिए फिर से उपयोग योग्य बनाया जाता है। यह पानी शुद्ध होकर दोबारा पीने योग्य पानी में बदल दिया जाता है।

अंतरिक्ष में हेयर ड्रायर जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं, इसलिए बालों को प्राकृतिक रूप से सूखने के लिए छोड़ दिया जाता है। सोफी अडेंनॉट ने कहा कि अंतरिक्ष में बाल धोना भले ही अलग अनुभव हो, लेकिन सही तकनीक और सीमित संसाधनों के साथ यह प्रक्रिया आसानी से पूरी की जा सकती है।

–आईएएनएस

एमटी/पीएम


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