भू-राजनीतिक तनावों के बीच मार्च में गोल्ड ईटीएफ में जोरदार उछाल, एयूएम तीन गुना बढ़कर हुआ 1.7 लाख करोड़ रुपए

नई दिल्ली, 15 अप्रैल (आईएएनएस)। भले ही फिजिकल सोने की मांग मजबूत रही हो, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी सोने में निवेश तेजी से बढ़ा है। गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) अब रिटेल और संस्थागत निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय हो गए हैं। मार्च 2026 में इनका कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) बढ़कर 1,71,468.4 करोड़ रुपए हो गया, जो सालाना आधार पर लगभग तीन गुना है।
आईसीआरए एनालिटिक्स की रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले पांच वर्षों में 64.76 प्रतिशत की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (सीएजीआर) को दर्शाता है। मार्च 2021 में यह एयूएम सिर्फ 14,122.72 करोड़ रुपए था।
सालाना आधार पर देखें तो मार्च 2025 के 58,887.99 करोड़ रुपए के मुकाबले एयूएम में 191.18 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है, जो बताता है कि भारत में गोल्ड से जुड़े निवेश तेजी से बढ़ रहे हैं।
मार्च 2026 में गोल्ड ईटीएफ में शुद्ध निवेश (इनफ्लो) 2,265.68 करोड़ रुपए रहा, जबकि पिछले साल इसी समय 77.21 करोड़ रुपए की निकासी (आउटफ्लो) हुई थी। वहीं मार्च 2021 में यह इनफ्लो सिर्फ 662.45 करोड़ रुपए था।
हालांकि, महीने-दर-महीने आधार पर इनफ्लो में गिरावट देखी गई। फरवरी 2026 के 5,254.95 करोड़ रुपए के मुकाबले मार्च में यह 56.88 प्रतिशत घट गया। इसकी वजह सोने की कीमतों में थोड़े समय के लिए गिरावट और वैश्विक जोखिम में कमी बताई गई है।
आईसीआरए एनालिटिक्स के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और मार्केट डेटा के हेड अश्विनी कुमार ने कहा कि निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने के पीछे दो बड़े कारण हैं; पहला, वैश्विक अनिश्चितता और दूसरा, सोने की मजबूत कीमतें।
उन्होंने बताया कि हाल के समय में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और सोने की कीमतों में तेजी के कारण निवेशकों ने गोल्ड ईटीएफ को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में अपनाया है।
उन्होंने यह भी कहा कि सोना हमेशा से सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है और यही वजह है कि इसमें निवेश बढ़ा है।
फिलहाल बाजार में 26 गोल्ड ईटीएफ स्कीम उपलब्ध हैं, जिनमें से 6 स्कीम वित्त वर्ष 2025-26 में लॉन्च की गई हैं।
इन फंड्स का एक साल का औसत रिटर्न करीब 58.81 प्रतिशत से 62.85 प्रतिशत के बीच रहा है, जबकि पांच साल का सीएजीआर रिटर्न लगभग 25.78 प्रतिशत से 26.11 प्रतिशत के बीच है।
हालांकि हाल के महीनों में इनफ्लो थोड़ा कम हुआ है, लेकिन निवेशकों का भरोसा इस एसेट क्लास पर बना हुआ है।
अश्विनी कुमार ने आगे कहा कि छोटी अवधि की गिरावट के बावजूद गोल्ड ईटीएफ की अहमियत बनी हुई है और इनफ्लो में कमी आने के बावजूद यह पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, जिससे साफ है कि निवेशकों की रुचि अभी भी बरकरार है।
उन्होंने फिजिकल गोल्ड और ईटीएफ निवेश के बीच अंतर बताते हुए कहा कि गोल्ड ईटीएफ निवेश, पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन और बेहतर रिटर्न के लिए ज्यादा उपयुक्त है, जबकि फिजिकल गोल्ड अधिकतर उपयोग और पारंपरिक कारणों से खरीदा जाता है।
–आईएएनएस
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