तेजी से बदलती दुनिया में एक शक्ति पर आधारित व्यवस्था नाकाम: भारत में ईरान के राजदूत फतहली


नई दिल्ली, 16 मई (आईएएनएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने शनिवार को कहा कि 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस बात को रेखांकित करने का एक महत्वपूर्ण अवसर है कि किसी एकल शक्ति की गारंटी पर आधारित वैश्विक सुरक्षा ढांचा, तेजी से बदलती और जटिल होती विश्व व्यवस्था में विफल साबित हुआ है।

यह बयान ब्रिक्स के विस्तारित समूह में शामिल होने के बाद वैश्विक सुरक्षा और समृद्धि के लिए बहुध्रुवीय व्यवस्था तथा सामूहिक दृष्टिकोण की वकालत को लेकर तेहरान के रुख को भी दर्शाता है।

ईरानी राजदूत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन इस अहम सच्चाई को उजागर करने का अवसर है कि किसी एक शक्ति, चाहे वह कितनी भी बड़ी क्यों न हो, द्वारा सुरक्षा और समृद्धि की गारंटी पर आधारित मॉडल आज की जटिल और तेजी से बदलती दुनिया में विफल साबित हुआ है।”

ईरानी राजदूत ने यह बयान गुरुवार और शुक्रवार को नई दिल्ली में समूह की भारत की अध्यक्षता में हुई दो दिन की ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की मीटिंग के खत्म होने के तुरंत बाद दिया है। इस हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने की। समिट में ब्रिक्स सदस्य देशों के साथ-साथ साझेदार देशों के विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय राजधानी में ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुखों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स बहुपक्षवाद को मजबूत करने, सतत विकास को बढ़ावा देने, आर्थिक लचीलापन बढ़ाने और अधिक समावेशी वैश्विक व्यवस्था के निर्माण की दिशा में काम करेगा।

मीटिंग के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने यह भी भरोसा जताया कि सदस्य देशों के बीच बातचीत एक ज्यादा स्थिर, बराबर और समावेशी अंतरराष्ट्रीय सिस्टम बनाने में मदद करेगी।

उन्होंने सुधार वाले बहुपक्षवाद के महत्व पर जोर दिया और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी और अस्थायी दोनों कैटेगरी में सुधारों की मांग की। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी नई दिल्ली में ब्रिक्स मीटिंग के दौरान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार का मुद्दा उठाया और कहा कि ऐसे सुधार कोई पसंद या विकल्प नहीं, बल्कि यूएन के बने रहने के लिए जरूरी हैं।”

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि ईरान एक ऐसी सुरक्षा परिषद चाहता है जो दुनिया के सभी महाद्वीपों और इलाकों का सही मायने में प्रतिनिधित्व करे। ब्रिक्स देशों को ग्लोबल गवर्नेंस को नया आकार देने और बहुपक्षीय संस्थानों में भरोसा वापस लाने के लिए अपनी मिलकर काम करने की ताकत का इस्तेमाल करना चाहिए।

उन्होंने कहा, “आज हम कुछ अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में जो देख रहे हैं, वह बहुपक्षीय नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून की आड़ में एकध्रुवीय बनाए रखने की कोशिश है। अंतरराष्ट्रीय कानून का सिलेक्टिव इस्तेमाल, एकतरफा प्रतिबंध का इस्तेमाल और देश की आजादी की अनदेखी, मौजूदा ग्लोबल गवर्नेंस फ्रेमवर्क में बढ़ते संकट को दिखाते हैं।”

–आईएएनएस

केके/वीसी


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