सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी, विपक्ष के सहयोग बिना नहीं चल सकती विधानसभा : स्पीकर सतीश महाना


लखनऊ, 5 अगस्त (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश विधानसभा में हंगामे पर स्पीकर सतीश महाना ने नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि विपक्ष का व्यवहार बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। मैं उनकी सभी चिंताओं को सुनने के लिए पूरी तरह तैयार था। साथ ही, उन्होंने कहा कि इसके बावजूद मैं चाहता हूं कि विधानसभा का सत्र अच्छे तरीके से चले।

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बुधवार सुबह समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “विपक्ष का व्यवहार बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। मैं उनकी सभी चिंताओं को सुनने के लिए पूरी तरह तैयार था। मैंने उन्हें हर मुद्दा उठाने के लिए कहने में लगभग दो घंटे बिताए। सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखते हुए, मैंने उनके सामने हाथ भी जोड़े। अगर कोई अपनी बात नहीं रखना चाहता, विधानसभा सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के सहयोग से चलती है। विपक्ष सहयोग नहीं करेगा तो विधानसभा नहीं चल पाएगी।”

उन्होंने कहा, “अगर विपक्ष के पास मुद्दा हो तो उस पर चर्चा की जा सकती है। सिर्फ शोर-शराबा करने से सदन नहीं चल सकता है। दो घंटे से अधिक समय तक मैंने लगातार बहुत प्रयास किए। इसके बावजूद मैं चाहता हूं कि विधानसभा का सत्र अच्छे तरीके से चले। आज जो भी विषय हैं, हम उन्हें सुनने के लिए तैयार हैं।”

वहीं, विधानसभा सत्र से निष्कासित सपा विधायक सचिन यादव को लेकर स्पीकर सतीश महाना ने कहा, “मुझे उम्मीद थी कि सचिन यादव एक पढ़े-लिखे व्यक्ति होने के नाते, कई अन्य सम्मानित विधायकों की तुलना में बेहतर व्यवहार करेंगे। लेकिन मंगलवार को मुझे बहुत निराशा हुई। जब विधानसभा में मुख्यमंत्री की तस्वीर गलत तरीके से दिखाई गई, तो मैंने उनसे उसे नीचे करने को कहा। मेरे निर्देश के बाद भी वह ऐसा करने को तैयार नहीं थे और यह बहुत निराशाजनक था।”

सतीश महाना ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना जरूरी है। यह किसी की व्यक्तिगत नहीं है। विधानसभा के सभी 403 सदस्यों का अधिकार है। इसके ऊपर कोई आक्रमण करता है तो यह विशेषाधिकार में आता है। हालांकि, सचिन यादव को ऐसा नहीं करना चाहिए था। जब उन्हें बोल दिया गया था, तब उन्हें तस्वीर नहीं कर लेनी चाहिए थी। अपनी जिद के कारण सचिन यादव ने बात को नहीं माना।

उन्होंने अपनी बात दोहराते हुए कहा, “सचिन यादव जैसे विधायक से मैं ऐसी अपेक्षा नहीं करता था। उनके आचरण से मुझे आत्मगिलानी हुई कि मेरी जो उपेक्षाएं थीं, उनका आचरण बिल्कुल विपरीत था।”

–आईएएनएस

डीसीएच/


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