इब्राहिम अल्काजीः भारतीय रंगमंच और नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा में लाई थी क्रांति, नसीरुद्दीन शाह और ओम पुरी जैसे कलाकारों को दी ट्रेनिंग

नई दिल्ली, 3 अगस्त (आईएएनएस)। जब-जब भारतीय रंगमंच (थिएटर) के इतिहास को खंगाला जाएगा, तो नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के पूर्व निदेशक इब्राहिम अल्काजी का नाम एक ऐसे मील के पत्थर के रूप में सामने आएगा जिसने नाटक को महज मनोरंजन के दायरे से निकलकर एक गंभीर अनुशासित और विश्वस्तरीय कला का दर्जा दिया। अल्काजी आधुनिक भारतीय रंगमंच के पितामह कहे जाने वाले एक महान निर्देशक और नाटककार नहीं थे, बल्कि एक असाधारण शिक्षक, कला पारखी और दूरदर्शी व्यक्तित्व के भी धनी थे। रंगमंच को अनुशासन का ककहरा देने वाले इब्राहिम अल्काजी का जन्म 18 अक्टूबर 1925 को पुणे में हुआ था और उनकी मृत्यु 4 अगस्त 2020 को हुई थी।
अल्काजी के पिता सऊदी अरब के एक खानाबदोश व्यापारी थे और उनकी माता कुवैती थीं। अल्काजी की प्रारंभिक शिक्षा पुणे में हुई और आगे की पढ़ाई के लिए मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज चले गए। मुंबई में ही उनका झुकाव कला साहित्य की ओर हुआ। मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज में पढ़ाई के दौरान वह सुल्तान ‘बॉबी’ पदमसी की अंग्रेजी थियेटर कंपनी से जुड़ गए। जहां उन्होंने कई नाटकों में अभिनय किया और उनमें से कुछ का निर्देशन भी किया।
पिता की सलाह पर वह 1947 में लंदन गए और रॉयल एकेडेमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट में प्रशिक्षण लिया। यहां उन्होंने पश्चिमी रंगमंच की तकनीकी, प्रकाश व्यवस्था, सेट डिजाइनिंग और अभिनय की बारीकियां सीखीं। लंदन में उन्हें इंग्लिश ड्रामा लीग और ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन द्वारा सम्मानित किए जाने के बाद करियर के अवसर मिले। हालांकि, उन्होंने घर लौटने और थिएटर ग्रुप में फिर से शामिल होने के कारण प्रस्तावों को ठुकरा दिया। इंग्लैंड से लौटने के बाद इब्राहिम अलकाजी ने 1952 में बॉम्बे में थिएटर ग्रुप का पुनर्गठन किया। रंगरूप से अंग्रेज दिखने वाले इब्राहिम अल्काजी इतने भारतीय थे कि देश के विभाजन के समय जब उनके परिवार के अधिकांश सदस्य पाकिस्तान चले गए तब वे भारत में ही रहे।
इब्राहिम अल्काजी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव 1962 में शुरू हुआ, जब वे राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) के निदेशक बने। वे 1962 से 1977 तक इस पद पर बने रहे। एनएसडी के लिए उन्होंने एक ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया, जो न केवल अभिनेता प्रशिक्षण और निर्देशन पर केंद्रित था, बल्कि रंगमंच कला के सभी पहलुओं के शिक्षण पर भी जोर देता था। एनएसडी के निदेशक के रूप में, अल्काजी ने अपनी दूरदृष्टि और तकनीकी अनुशासन की उत्कृष्टता से हिंदी रंगमंच में क्रांति ला दी। 60 के दशक से ही, एनएसडी में अल्काजी द्वारा तराशी गई उत्कृष्ट प्रतिभाओं ने आर्टहाउस सिनेमा और फिर मुख्यधारा के सिनेमा और टेलीविजन को एक नई दिशा दी।
अल्काजी के छात्रों में विजया मेहता, ओम शिवपुरी, हरपाल तिवाना और नीना तिवाना, ओम पुरी, बलराज पंडित (पंडित जी), नसीरुद्दीन शाह, मनोहर सिंह, उत्तरा बाओकर, ज्योति सुभाष, सुहास जोशी, बी. जयश्री, जयदेव और रोहिणी हट्टंगड़ी, कुमार वर्मा, एस. रामानुजम सहित कई प्रसिद्ध फिल्म और थिएटर अभिनेता और निर्देशक शामिल हैं।
अल्काजी ने 50 से अधिक नाटकों का निर्देशन किया है, जिनमें गिरीश कर्नाड का तुगलक, मोहन राकेश का आषाढ़ का एक दिन, धर्मवीर भारती का अंधा युग और कई शेक्सपियर और ग्रीक नाटक शामिल हैं। इब्राहिम अल्काजी को रंगमंच में योगदान के लिए पद्म श्री (1966), पद्म भूषण (1991) और भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण (2010), संगीत नाटक अकादमी सहित कई पुरस्कार प्राप्त हुए। 4 अगस्त 2020 को 94 वर्ष की आयु में महान रंगकर्मी ने दुनिया को अलविदा कह दिया।
–आईएएनएस
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