प्रियंका गांधी के प्रो. कामाकोटी को 'गोमूत्र विशेषज्ञ' कहने पर बवाल, भाजपा और शिक्षाविदों ने जताया कड़ा विरोध


नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। लोकसभा में पेपर लीक रोकने और शिक्षा सुधार बिल पर चर्चा के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा द्वारा आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामाकोटी पर की गई टिप्पणी को लेकर सियासी बवाल बढ़ गया है। प्रियंका गांधी ने प्रो. कामाकोटी को ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ कहकर संबोधित किया था, जिसके बाद भाजपा और शिक्षा जगत के लोगों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

तेलंगाना भाजपा सचिव बंदारू विजया लक्ष्मी ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “जाने-माने वैज्ञानिक कामाकोटी पर प्रियंका गांधी की टिप्पणी बहुत शर्मनाक है। जरा देखिए कि कौन किस पर टिप्पणी कर रहा है। वह परिवार-आधारित राजनीति से आई हैं और मेरा पक्का मानना है कि उन्हें भारत की जड़ों के बारे में कोई जानकारी नहीं है।”

मुंबई में शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने भी प्रियंका गांधी के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा, “लोकसभा में पेपर लीक रोकने और शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाने वाले बिल पर चर्चा के दौरान, प्रियंका वाड्रा ने आईआईटी मद्रास के डायरेक्टर प्रो. वी. कामाकोटी के बारे में बहुत आपत्तिजनक टिप्पणी की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिक्षा क्षेत्र में सुधार लाने के लिए बनाई गई छह सदस्यीय टास्क फोर्स में प्रो. कामाकोटी को सदस्य नियुक्त किया था। प्रियंका गांधी ने टिप्पणी की कि ऐसे लोगों को इसलिए सदस्य बनाया गया क्योंकि वे ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ थे। उनका यह बयान बेहद शर्मनाक है।”

शिक्षा जगत से भी इस टिप्पणी को लेकर विरोध के स्वर उठे हैं। जूनागढ़ एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर वी.पी. चोवटिया ने कहा, “मेरी राय में वी.पी. कामाकोटी आईआईटी मद्रास के जाने-माने डायरेक्टर हैं। वे बहुत पढ़े-लिखे व्यक्ति भी हैं। उन्होंने 150 से ज्यादा रिसर्च पेपर पब्लिश किए हैं। उन्होंने छात्रों के लिए भी कई सुधार किए हैं। इसके अलावा, वे 50 से ज्यादा बिजनेस सुधारों से भी जुड़े रहे हैं। केंद्र सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया है।”

ओडिशा के भुवनेश्वर में उत्कल यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर प्रो. चंडी प्रसाद नंदा ने भी इस मामले पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा, “कल प्रेस में मैंने यह मामला देखा और मैंने इसे एक अलग संदर्भ में देखने की कोशिश की, क्योंकि मेरी ट्रेनिंग इतिहास जैसे विषय में हुई है, और मेरा विषय मुझे सिखाता है कि किसी भी बारीक सवाल पर बहुत अलग तरह से विचार किया जाए। उदाहरण के लिए, यह सवाल उठता है कि क्या यह वैज्ञानिक, तर्कसंगत या सही है कि उन्हें ‘गोमूत्र विशेषज्ञ’ कहा जाए।”

–आईएएनएस

एससीएच/एमएस


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