अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव, मार्केट पर पड़ा असर


न्यूयॉर्क, 30 जुलाई (आईएएनएस)। महंगाई के खतरे को देखते हुए अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने ब्याज दर को 3.5 फीसदी से 3.75 फीसदी पर बिना किसी बदलाव के रखा है।

बुधवार (स्थानीय समय) को हुए इस फैसले से स्टॉक मार्केट में भारी गिरावट आई। इसमें डॉव जोन्स 1,153 पॉइंट्स या 2.19 फीसदी और एनएएसडीएक्यू 433 पॉइंट्स या 1.74 फीसदी नीचे आ गया।

रेट तय करने वाली फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (एफओएमसी) में मतभेद था। नौ सदस्यों ने रेट को बिना बदले सामान्य रखने के लिए पक्ष में वोट किया, जबकि तीन ने चौथाई पॉइंट रेट बढ़ाने के लिए दबाव डाला। इन तीन में मिनियापोलिस फेडरल रिजर्व के नील काशकारी भी शामिल थे।

फेड चेयरमैन केविन वार्श ने ब्याज दरों को लेकर चल रही असहमति को “अच्छी पारिवारिक बहस” बताया। उनका कहना है कि लक्ष्य महंगाई पर काबू पाना है, लेकिन साथ ही अर्थव्यवस्था को स्थिर रखना और रोजगार बाजार को बढ़ाना भी जरूरी है।

वार्श को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फेड का प्रमुख नियुक्त किया था। ट्रंप का अपने पूर्व फेड प्रमुख जेरोम पॉवेल से ब्याज दरें घटाने से इनकार करने को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था।

वार्श के ब्याज दर में कटौती न करने के फैसले से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नाराज हैं। वर्तमान समय में महंगाई बढ़ने के संकेत दिख रहे हैं। इस महंगाई का कारण ट्रंप के ईरान युद्ध और अमेरिका और दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव को माना जा रहा है है।

खाड़ी में चल रहे संघर्ष को महंगाई का एक कारण माना जा रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने व्हाइट हाउस में रिपोर्टरों से बातचीत के दौरान वॉर्श का बचाव करते हुए कहा कि वह शानदार काम कर रहे हैं। वहीं, ब्याज दर में कमी ना करने का दोष एफओएमसी पर डाल दिया।

उन्होंने कहा, “मुझे पता है कि वह कम ब्याज दर देखना पसंद करेंगे, लेकिन उनके पास एक बोर्ड है और यह एक पॉलिटिकल बोर्ड है और वे रेट को ऊपर रखना चाहते हैं।”

मई में पदभार संभालने के बाद से यह दूसरी बार था जब वार्श एफओएमसी की रेट-सेटिंग मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे थे और रेट फिर से स्थिर रहे।

सितंबर में होने वाली अगली मीटिंग नवंबर में होने वाले मिड-टर्म चुनाव से पहले आखिरी मीटिंग होगी।

जून कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स रिपोर्ट में एक साल पहले की तुलना में 3.5 फीसदी की बढ़ोतरी दिखाई गई। मीटिंग के बाद, वार्श ने महंगाई को दो फीसदी तक लाने के लक्ष्य के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे ब्याज दर कम करने का उनका विकल्प कम हो गया।

वार्श कम महंगाई और रोजगार बढ़ोतरी के दोहरे लक्ष्यों के बीच संतुलन साधने की बात कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि मूल्य स्थिरता और पूर्ण रोजगार में से किसी एक को चुनना जरूरी नहीं है। जहां भी जरूरत होगी और जो सही होगा, हम कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।”

–आईएएनएस

केके/एएस


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