सावन शुरू होते ही झारखंड के बैद्यनाथ धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, 105 किमी लंबे रास्ते पर कांवड़ियों की लंबी कतार


देवघर, 30 जुलाई (आईएएनएस)। गुरुवार को सावन माह की शुरुआत के साथ ही झारखंड स्थित विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ धाम में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है। बिहार के सुल्तानगंज स्थित में उत्तरवाहिनी गंगा से लेकर झारखंड के देवघर तक ज्योतिर्लिंग तक करीब 105 किलोमीटर लंबे कांवर पथ पर गेरुआ वस्त्रधारी कांवड़ियों की लंबी कतार दिखी और पूरा इलाका बोल बम के नारों से गूंजा।

श्रावणी मेले का औपचारिक शुभारंभ बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित दुम्मा प्रवेश द्वार पर बुधवार को वैदिक मंत्रोच्चार और विशेष पूजा के साथ हुआ था। गुरुवार को अहले सुबह चार बजे बाबा बैद्यनाथ मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद गर्भगृह से पिछले दिन के पुष्प हटाकर पारंपरिक कांचा जल से शुद्धिकरण किया गया। लगभग एक घंटे तक वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक सरदारी पूजा संपन्न हुई। इसके बाद आम श्रद्धालुओं के लिए जलार्पण का मार्ग खोल दिया गया। पहले ही दिन मंदिर परिसर, शिवगंगा, दुम्मा प्रवेश द्वार और कांवर पथ पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ धाम देश के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है और यह दुनिया का एकमात्र ऐसा तीर्थ है, जहां ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ एक ही परिसर में स्थित हैं। परंपरा के अनुसार श्रद्धालु बिहार के सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का पवित्र जल कांवड़ में भरकर 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी करने के बाद बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करते हैं।

इसके बाद दुमका जिले के बासुकीनाथ धाम में पूजा-अर्चना के साथ उनकी कांवड़ यात्रा पूर्ण मानी जाती है। भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा को देखते हुए इस बार प्रशासन ने कई अहम बदलाव किए हैं। पूरे श्रावण मास के दौरान स्पर्श पूजा पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। श्रद्धालु गर्भगृह के बाहर स्थापित आधुनिक अरघा प्रणाली के माध्यम से ही जल अर्पित कर सकेंगे। सावन में वीआईपी, वीवीआईपी और आउट ऑफ टर्न दर्शन की व्यवस्था भी बंद कर दी गई है, ताकि सभी श्रद्धालुओं को समान अवसर मिल सके।

रविवार और सोमवार को शीघ्रदर्शनम पास की सुविधा भी उपलब्ध नहीं रहेगी, जबकि अन्य दिनों में इसकी शुल्क राशि बढ़ाई गई है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए इस बार पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित निगरानी, फेशियल रिकग्निशन कैमरे और ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है। पूरे मेला क्षेत्र में 11,500 से अधिक पुलिसकर्मी, सीआरपीएफ और झारखंड जगुआर के जवान तैनात किए गए हैं। शिकायतों के त्वरित निस्तारण के लिए क्यूआर कोड आधारित शिकायत प्रणाली भी लागू की गई है।

–आईएएनएस

एसएनसी/एसके


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