मानसून से पहले चेन्नई में बाढ़ रोकने की तैयारी तेज, कई परियोजनाएं अंतिम चरण में; अधूरे ड्रेनेज बने चिंता का कारण


चेन्नई, 23 जुलाई (आईएएनएस)। उत्तर-पूर्वी मानसून के करीब आते ही ग्रेटर चेन्नई कॉरपोरेशन (जीसीसी) ने शहर में बाढ़ से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर काम तेज कर दिया है। नहरों की सफाई और पुनर्स्थापना, स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजनाएं और जलाशयों के सुधार से जुड़े कई काम जुलाई से अक्टूबर के बीच पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है।

हालांकि नगर निगम का दावा है कि अधिकांश महत्वपूर्ण परियोजनाएं अंतिम चरण में हैं, लेकिन स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कई जगहों पर ड्रेनेज की कड़ियां अभी भी अधूरी हैं, नालों की सफाई पूरी नहीं हुई है और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की कमी शहर की बाढ़ से निपटने की तैयारियों पर असर डाल सकती है।

जीसीसी आयुक्त जी. एस. समीरन ने बताया कि शहर की जल निकासी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्रमुख नहरों की मरम्मत और सफाई को प्राथमिकता दी गई है। शहर की 44 नहरों में से 33 नहरों में 295.25 करोड़ रुपए की लागत से गाद निकालने, रिटेनिंग वॉल को मजबूत करने और सुरक्षा बाड़ लगाने का काम चल रहा है।

उन्होंने बताया कि 28 नहरों का काम पूरा हो चुका है। वहीं ट्रस्टपुरम, ओटेरी नुल्लाह, विरुगंबक्कम नहर, रेड्डी कुप्पम नहर और कैप्टन कॉटन नहर जैसे प्राथमिकता वाले हिस्सों का काम 15 अक्टूबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

डीमेलोज रोड स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना को 30 सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं अंबत्तूर सरप्लस डायवर्जन चैनल, जो ईस्ट एवेन्यू रोड को ओटेरी नुल्लाह से जोड़ता है, उसका काम 15 अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है।

आयुक्त के अनुसार, चेन्नई में स्टॉर्म वाटर ड्रेन की 155 मिसिंग लिंक की पहचान की गई है। इनमें लगभग 140 किलोमीटर लंबाई वाले अधूरे हिस्सों में से 103 किलोमीटर का काम पूरा हो चुका है, जबकि बाकी काम 30 सितंबर तक पूरा कर लिया जाएगा।

इंटीग्रेटेड स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना (फेज-1 से 3) के तहत प्रस्तावित 310 किलोमीटर नेटवर्क में से 264.20 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है। शेष महत्वपूर्ण हिस्सों का काम 15 अक्टूबर तक पूरा करने की योजना है।

वहीं कोसस्थलैयार नदी बेसिन में चल रही इंटीग्रेटेड अर्बन फ्लड मैनेजमेंट परियोजना (जिसमें तिरुवोट्टियूर, मनाली, माधवरम, तिरु वी का नगर और अन्ना नगर के कुछ इलाके शामिल हैं) 99.6 प्रतिशत पूरी हो चुकी है। 3,059 करोड़ रुपए की इस परियोजना के तहत प्रस्तावित 636 किलोमीटर नेटवर्क में से 633.46 किलोमीटर का निर्माण पूरा हो चुका है और इसके इसी महीने पूरा होने की उम्मीद है।

हालांकि इन प्रगति रिपोर्टों के बावजूद स्थानीय निवासी और नागरिक संगठनों का कहना है कि शहर के कई इलाकों में अब भी बाढ़ का खतरा बना हुआ है। उनका आरोप है कि कई जगहों पर ड्रेनेज नेटवर्क अधूरा है, स्टॉर्म वाटर ड्रेन की कड़ियां नहीं जुड़ी हैं और नालों की सफाई भी पूरी तरह नहीं हुई है।

उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम के विभिन्न विभागों और अन्य एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी के कारण कई स्थानों पर खुले बिजली के तार, गलत तरीके से लगाए गए कैचपिट कवर और प्रभावी ढंग से काम न करने वाली जल निकासी व्यवस्था जैसी समस्याएं बनी हुई हैं।

अन्य परियोजनाओं की बात करें तो कोवलम बेसिन की इंटीग्रेटेड स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना का 89 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसे फरवरी 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। वहीं आर्कोट रोड स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना अक्टूबर तक पूरी होने की उम्मीद है। मनाली स्थित कडापक्कम झील के इको-रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट का 80 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है और इसके भी इसी महीने समाप्त होने की संभावना है। इसके अलावा पुझल सरप्लस कैनाल से जुड़ी माधवरम स्टॉर्म वाटर ड्रेन परियोजना को सितंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

–आईएएनएस

वीकेयू/पीएम


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