महाराष्‍ट्र: डॉक्टरों के संगठन ने शिवसेना कॉर्पोरेटर की गिरफ्तारी का स्वागत किया, जारी रहेगा 'ब्लैक रिबन' विरोध प्रदर्शन


मुंबई, 8 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र स्टेट एसोसिएशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स (एमएआरडी) ने शिवसेना कॉर्पोरेटर रमेश म्हात्रे की गिरफ्तारी का स्वागत किया है। म्हात्रे और उनके साथियों ने ठाणे के एक अस्पताल में ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों (जिनमें एक महिला डॉक्टर भी शामिल थीं) पर हमला किया था।

संगठन ने कहा कि कल यानी गुरुवार को होने वाला ‘ब्लैक रिबन’ विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।

डॉक्टरों के संगठन ने कहा कि डॉक्टर समेत सभी हेल्थकेयर वर्कर मेडिकल बिरादरी के खिलाफ ‘बढ़ती हिंसा’ के विरोध में राज्य भर के सभी सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में ‘ब्लैक रिबन’ विरोध प्रदर्शन करेंगे।

कॉर्पोरेटर को ठाणे पुलिस ने बुधवार को गिरफ्तार कर लिया। उनके और तीन अन्य लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। उन सभी को मेडिकल-लीगल जांच के लिए सरकारी अस्पताल ले जाया गया, जिसके बाद उन्हें सजा दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जाएगा।

एमएआरडी ने बयान में कहा, “समय पर हुई यह गिरफ्तारी एक कड़ा संदेश देती है कि डॉक्टरों और हेल्थकेयर वर्करों के खिलाफ हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राज्यव्यापी एक दिवसीय विरोध प्रदर्शन योजना के अनुसार जारी रहेगा। यह विरोध न केवल इस घटना के खिलाफ है, बल्कि राज्य भर में हेल्थकेयर वर्करों के खिलाफ हिंसा की बढ़ती घटनाओं के खिलाफ भी है। साथ ही, यह सभी डॉक्टरों और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स के लिए सुरक्षित कामकाजी माहौल की हमारी मांग को दोहराने के लिए भी है।”

यह चौंकाने वाली घटना 6 जुलाई को डोंबिवली के शास्त्री नगर अस्पताल में हुई थी। कॉर्पोरेटर अपने समर्थकों के साथ अस्पताल में घुस आए और डॉक्टरों पर लापरवाही और ड्यूटी में कोताही का आरोप लगाते हुए उनकी पिटाई कर दी।

कॉर्पोरेटर और उनके गुंडों को अस्पताल में डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ को पीटते और घूंसे मारते हुए कैमरे में कैद किया गया। इस घटना से जनता और डॉक्टरों के समुदाय में भारी हंगामा और आक्रोश फैल गया।

हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद म्हात्रे और अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। बुधवार को उन्हें और तीन अन्य आरोपियों को उनके घर से हिरासत में लिया गया।

अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार, हंगामा और हिंसा तब हुई जब डॉक्टरों ने नवजात शिशु के रिश्तेदारों को बच्चे को किसी दूसरे अस्पताल में ले जाने की सलाह दी, क्योंकि अस्पताल के नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) में बेड उपलब्ध नहीं थे।

–आईएएनएस

एएसएच/डीकेपी


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