आईडीएफसी फर्स्ट बैंक फंड गड़बड़ी मामले में सीबीआई की बड़ी कार्रवाई, दो अधिकारी गिरफ्तार

नई दिल्ली, 30 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन एरिया हेड शमीम डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (मोहाली ब्रांच) के तत्कालीन ब्रांच मैनेजर चरणजीत सिंह रंधावा को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी हरियाणा सरकार के विभागों के सरप्लस फंड को फिक्स्ड डिपॉजिट में गलत तरीके से निवेश करने और इस मकसद से खोले गए बैंक अकाउंट्स के जरिए धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन करने के मामले में की गई है।
सीबीआई जांच में पता चला कि दोनों आरोपियों ने बैंक अधिकारियों के तौर पर बैंक अकाउंट्स खोलने और धोखाधड़ी वाले ट्रांजैक्शन करने में अहम भूमिका निभाई, जिसके जरिए सरकारी फंड का गलत इस्तेमाल किया गया। जांच के दौरान उनके खिलाफ सबूत इकट्ठा किए गए, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया है और पंचकूला में स्पेशल जज के सामने पेश किया गया।
सीबीआई ने राज्य सरकार के अनुरोध पर हरियाणा के स्टेट विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो से जांच अपने हाथ में ली थी। यह धोखाधड़ी चंडीगढ़ के सेक्टर 32 स्थित आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ब्रांच में हुई थी, जिसमें हरियाणा सरकार के 8 विभागों के 504 करोड़ रुपए जाली/फर्जी फिक्स्ड डिपॉजिट/डेबिट नोट के जरिए फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिए गए थे।
अब तक सीबीआई ने हरियाणा के इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है, जिनमें आईडीएफसी फर्स्ट बैंक/एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के 6 अधिकारी, हरियाणा सरकार के 3 सरकारी कर्मचारी, 2 कंपनी और 6 प्राइवेट व्यक्ति शामिल हैं।
इसके अलावा सीबीआई ने चंडीगढ़ यूनियन टेरिटरी से 2 और मामले अपने हाथ में लिए हैं, जिनमें से एक चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी (सीएससीएल)/चंडीगढ़ म्युनिसिपल कॉरपोरेशन से और दूसरा क्रेस्ट चंडीगढ़ से जुड़ा है। सीबीआई ने इन मामलों में भी एक-एक चार्जशीट दाखिल की है।
सीबीआई ने सीएससीएल मामले में 5 बैंकरों, 1 सीएससीएल अधिकारी और 1 प्राइवेट व्यक्ति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। वहीं, क्रेस्ट मामले में 5 बैंकरों, 2 क्रेस्ट अधिकारियों, 4 प्राइवेट व्यक्तियों और 2 कंपनियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
सीबीआई इन सभी मामलों में सभी जिम्मेदार लोगों को सजा दिलाने और गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए सरकारी फंड का पूरा पता लगाने के लिए जांच में जुटी है।
–आईएएनएस
डीके/वीसी