पश्चिम एशिया युद्ध के दौरान ऊर्जा संकट से निपटने में केंद्र सरकार का काम असाधारण रहा: अमिताभ कांत


नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। भारत के पूर्व जी20 शेरपा अमिताभ कांत ने सोमवार को कहा कि पश्चिम एशिया में युद्ध के बाद पैदा हुए वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने में भारत सरकार ने असाधारण काम किया। उन्होंने कहा कि सरकार की प्रभावी रणनीति के कारण देश के उपभोक्ताओं पर ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर नहीं पड़ा, ईंधन की कालाबाजारी नहीं हुई और घरों तक एलपीजी सिलेंडर की नियमित आपूर्ति जारी रही।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस को दिए एक विशेष साक्षात्कार में अमिताभ कांत ने कहा, “मैं इस दौरान भारत सरकार द्वारा उठाए गए कई कदमों की सराहना करना चाहूंगा। यह संकट हमारी वजह से नहीं आया था, बल्कि यह पूरी दुनिया का संकट था। दुनिया के लगभग हर देश में उपभोक्ता प्रभावित हुए, लेकिन भारत में किसी भी उपभोक्ता पर इसका असर नहीं पड़ा। मेरे विचार से यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) कम किया और साथ ही ईंधन आपूर्ति के स्रोतों का भी विस्तार सुनिश्चित किया।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने इस संकट का सामना दूरदृष्टि और मजबूती के साथ किया। कोविड महामारी की तरह इस संकट के दौरान भी सभी मंत्रालयों ने मिलकर काम किया।

उन्होंने बताया कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते भारत के 12 जहाज कच्चा तेल लेकर सुरक्षित देश वापस पहुंचे। उन्होंने इसे भारत की सफल कूटनीति का बड़ा उदाहरण बताया।

नीति आयोग के पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) ने कहा कि भारत दुनिया के उन देशों में शामिल है, जो अपनी जरूरत का लगभग 86 प्रतिशत कच्चा तेल और करीब 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है। इसके बावजूद सरकार ने ऊर्जा संकट का जिस तरह सामना किया, वह पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने पेट्रोल पर 10 रुपए प्रति लीटर और डीजल पर उत्पाद शुल्क को शून्य तक लाकर वैश्विक स्तर पर कीमतें बढ़ने के बावजूद देश में ईंधन की कीमतों को नियंत्रण में रखा।

अमिताभ कांत ने बताया कि सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया कि उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों को 642 रुपए में एलपीजी सिलेंडर मिलता रहे, जबकि उसकी वास्तविक उत्पादन लागत लगभग 1,600 रुपए थी। यानी सरकार प्रति सिलेंडर करीब 900 रुपए की सब्सिडी दे रही थी।

उन्होंने कहा कि इससे भी अधिक महत्वपूर्ण कदम एलपीजी नियंत्रण आदेश था, जिसके कारण भारत की रिफाइनरियों में एलपीजी का उत्पादन काफी बढ़ गया।

उन्होंने बताया कि सरकार ने कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए 27 नए देशों को भी जोड़ा, जिससे आयात के स्रोतों में बड़ा विस्तार हुआ।

उन्होंने कहा कि एलपीजी नियंत्रण आदेश के कारण वे रिफाइनरियां भी एलपीजी बनाने लगीं, जो पहले इसका उत्पादन नहीं करती थीं। यह इस बात का बड़ा उदाहरण है कि भारत की रिफाइनरियां जरूरत पड़ने पर तेजी से खुद को नई परिस्थितियों के अनुरूप ढाल सकती हैं।

उन्होंने कहा, “हमने अपनी रिफाइनरियों में उत्पादन बढ़ाया और पाइपलाइन नेटवर्क का भी विस्तार सुनिश्चित किया।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या अब पेट्रोल और डीजल की कीमतें कम करने का समय आ गया है, तो अमिताभ कांत ने कहा, “स्थिति अब धीरे-धीरे सामान्य हो रही है, लेकिन अभी इस बारे में कुछ कहना जल्दबाजी होगा। भू-राजनीतिक तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। उम्मीद है कि आगे चलकर अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें कम होंगी और भारत को इसका लाभ मिलेगा।”

उन्होंने कहा कि इससे केवल भारत ही नहीं, बल्कि ग्लोबल साउथ और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को भी फायदा होगा। उन्होंने विश्वास जताया कि उचित समय आने पर सरकार उपभोक्ताओं और देश के नागरिकों के हित में आवश्यक निर्णय जरूर लेगी।

–आईएएनएस

डीबीपी


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