बेहतर प्रशासन के लिए प्रशासनिक डेटा को राष्ट्रीय संपत्ति बनाना आवश्यक: पीएम के प्रधान सचिव

नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव पी.के. मिश्रा ने सोमवार को कहा कि भारत के अलग-अलग विभागों में बिखरे प्रशासनिक डेटा को एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति में बदलने की जरूरत है। उनका कहना है कि यदि सरकारी डेटा का बेहतर एकीकरण किया जाए तो इससे सुशासन, नीति निर्माण और सरकारी सेवाओं की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा, साथ ही गोपनीयता और सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकती है।
सांख्यिकी दिवस के 20वें समारोह को संबोधित करते हुए मिश्रा ने कहा कि भारत में तेजी से हो रहे डिजिटल परिवर्तन के कारण सरकारी योजनाओं, नियामक संस्थानों और सार्वजनिक सेवाओं के माध्यम से बड़ी मात्रा में प्रशासनिक डेटा तैयार हो रहा है।
हालांकि उन्होंने कहा कि यह मूल्यवान डेटा अभी भी अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों तक ही सीमित है, जिससे इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
उन्होंने कहा, “इन डेटा सेट्स में आर्थिक गतिविधियों, सामाजिक विकास, बुनियादी ढांचे के निर्माण, वित्तीय समावेशन, स्वास्थ्य, शिक्षा और कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मौजूद हैं। लेकिन इनकी समृद्धता और व्यापकता के बावजूद अधिकांश डेटा मंत्रालयों, विभागों और विभिन्न संस्थाओं में बिखरा हुआ है, जिससे नीति निर्माण और सुशासन में इसका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।”
पी.के. मिश्रा ने आगे कहा कि प्रशासनिक डेटा को अब केवल विभागीय कामकाज का उप-उत्पाद (बाय-प्रोडक्ट) मानकर नहीं चलना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस डेटा को एक रणनीतिक राष्ट्रीय संसाधन के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जिससे महत्वपूर्ण डेटा की कमी को दूर किया जा सके, बेहतर नीतियां बनाई जा सकें और सरकारी योजनाओं का लाभ सही लोगों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके।
एकीकृत डेटा प्रणाली के फायदों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासनिक डेटा का बेहतर उपयोग सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को अधिक प्रभावी बना सकता है और सार्वजनिक सेवाओं की डिलीवरी को भी बेहतर कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि डेटा साझा करने और विभिन्न प्रणालियों को जोड़ने की प्रक्रिया में नागरिकों का भरोसा किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होना चाहिए।
उन्होंने कहा, “प्रशासनिक डेटा को विभागीय प्रक्रियाओं का उप-उत्पाद बनने के बजाय एक रणनीतिक राष्ट्रीय संपत्ति के रूप में विकसित करना होगा।”
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकारी एजेंसियों के बीच डेटा साझा करने और आपसी तालमेल बढ़ाने के दौरान नागरिकों की निजता, डेटा सुरक्षा और गोपनीयता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार, ‘प्राइवेसी बाय डिजाइन’ जैसे सिद्धांतों और मौजूदा कानूनी एवं नीतिगत ढांचे का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।
पी.के. मिश्रा ने भरोसेमंद और आपस में जुड़े डेटा सिस्टम को भारत के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी महत्वाकांक्षाओं से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि विश्वसनीय डेटा भविष्य में शासन और सार्वजनिक प्रशासन में एआई के जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग की मजबूत नींव साबित होगा।
–आईएएनएस
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