'मेड इन इंडिया' सिर्फ एक लेबल नहीं, बल्कि देश के प्रति जिम्मेदारी है: पीयूष गोयल


नई दिल्ली, 27 जून (आईएएनएस)। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि भारतीय उद्यमियों को यह हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि जब वे किसी उत्पाद पर ‘मेड इन इंडिया’ का लेबल लगाते हैं, तो वे केवल अपना नहीं, बल्कि पूरे देश का प्रतिनिधित्व कर रहे होते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारतीय उद्यमियों के लिए गुणवत्ता केवल कारोबारी मानक नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति एक जिम्मेदारी है।

पीयूष गोयल ने तमिलनाडु के अंबूर स्थित फ्लोरेंस शू कंपनी के संस्थापक अकील पनारुना का उदाहरण साझा किया, जिनसे उनकी मुलाकात लंदन में आयोजित बिजनेस प्लेनरी सेशन के दौरान हुई थी।

अकील ने उन्हें बताया कि एक अंतरराष्ट्रीय ग्राहक ने काहिरा हवाई अड्डे पर ह्यूगो बॉस ब्रांड का एक लग्जरी जूता देखा। जब उसने जूते का लेबल देखा, तो उस पर ‘मेड इन इंडिया’ लिखा था। यह जूता अकील की कंपनी में तैयार किया गया था।

गोयल ने कहा कि अकील जैसे उद्यमियों के लिए गुणवत्ता केवल कंपनी का प्रदर्शन मापने का पैमाना नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति उनकी जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि अकील का काम केवल भारतीय कारीगरी को दुनिया के बड़े ब्रांडों तक पहुंचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर रोजगार भी पैदा किया है, विनिर्माण क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाया है और ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ जैसी पर्यावरण अनुकूल तकनीकों को भी अपनाया है।

पीयूष गोयल ने आगे कहा कि जैसे-जैसे भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (सीईटीए) के जरिए दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध मजबूत हो रहे हैं, वैसे-वैसे अकील जैसे उद्यमी पूरी दुनिया को यह साबित कर रहे हैं कि ‘ब्रांड इंडिया’ आज वैश्विक स्तर पर सबसे ऊंचे मानकों पर खड़ा है।

उन्होंने ऐसे सभी उद्यमियों को बधाई दी, जो ‘मेड इन इंडिया’ को भरोसे, उत्कृष्टता और गर्व का प्रतीक बना रहे हैं तथा दुनिया के सामने नए मानक स्थापित कर रहे हैं।

इससे पहले दिन में पीयूष गोयल ने एशिया हाउस और दुनिया की प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक गोलमेज बैठक में हिस्सा लिया। इस दौरान आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने और भविष्य के नए अवसरों पर चर्चा हुई।

उन्होंने कहा कि बैठक के दौरान भारत के मजबूत विनिर्माण तंत्र और विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला गया, जिनके माध्यम से भारत-यूके सीईटीए दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूत बना सकता है।

गोयल ने यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूकेआईबीसी) के सदस्यों के साथ भी एक संवादात्मक लंच बैठक की, जिसमें दुनिया की कई प्रमुख कंपनियों के शीर्ष अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

उन्होंने बताया कि इस चर्चा का मुख्य उद्देश्य नए कारोबारी अवसरों की पहचान करना, निवेश को गति देना और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाकर साझा विकास को आगे बढ़ाना रहा। साथ ही, भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को और मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया।

–आईएएनएस

डीबीपी


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