बिहार सरकार ने भरत तिवारी मुठभेड़ मामले में तेज की जांच, डीआइजी कर रहे निगरानी


पटना, 22 जून (आईएएनएस)। बिहार सरकार ने भरत तिवारी मुठभेड़ मामले की जांच तेज कर दी है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि व्यापक जांच सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक और न्यायिक दोनों तंत्रों का उपयोग किया जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अतिरिक्त महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) सुधांशु कुमार ने कहा कि विस्तृत जांच की जिम्मेदारी शाहबाद रेंज के उप महानिरीक्षक (डीआईजी) को सौंपी गई है।

एडीजी के अनुसार, मुठभेड़ से संबंधित परिस्थितियों की जांच के लिए आधुनिक फोरेंसिक तकनीकों और वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जा रहा है।

जांच में फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) विश्लेषण, तकनीकी और डिजिटल साक्ष्यों की जांच, भौतिक साक्ष्यों का संग्रह और सत्यापन, और उपलब्ध वीडियो फुटेज और अन्य सामग्रियों की जांच शामिल है।

पुलिस मुख्यालय जांच की प्रगति पर लगातार नजर रख रहा है।

राज्य सरकार के निर्देशों पर कार्रवाई करते हुए, हाई कोर्ट के एक सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता में एक न्यायिक जांच आयोग का गठन किया गया है, जो इस घटना की स्वतंत्र जांच करेगा।

आयोग से मुठभेड़ से पहले की घटनाओं के क्रम की जांच करने, सबूतों और गवाहों के बयानों की समीक्षा करने और सरकार को अपने निष्कर्ष और सिफारिशें सौंपने की उम्मीद है।

न्यायिक जांच पुलिस जांच से अलग काम करेगी।

अधीक्षक महानिदेशक सुधांशु कुमार ने बताया कि इस घटना के संबंध में दो अलग-अलग एफआईआर दर्ज की गई हैं।

उन्होंने कहा कि आगे की कानूनी कार्रवाई इन मामलों की विषयवस्तु और जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों के आधार पर की जाएगी।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, जांचकर्ताओं ने कुछ पुलिसकर्मियों की ओर से गंभीर लापरवाही पाई है।

एडीजी ने बताया कि जब पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे, तो आरोपियों को काबू में करने के लिए कथित तौर पर उचित कदम नहीं उठाए गए।

इसके बाद स्थिति और बिगड़ गई और घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे।

इन कथित लापरवाहियों को ध्यान में रखते हुए, अधिकारियों ने संबंधित एसएचओ समेत पांच पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।

–आईएएनएस

एमएस/


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