अल नीनो की चुनौती से निपटने को गुजरात तैयार, सीएम भूपेंद्र पटेल ने की समीक्षा बैठक


गांधीनगर, 18 जून (आईएएनएस)। गुजरात सरकार ने अल नीनो के संभावित असर से निपटने की अपनी तैयारियों की समीक्षा की है। मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने गुरुवार को गांधीनगर में एक हाई-लेवल मीटिंग की अध्यक्षता की, जिसमें मानसून से जुड़े मौसम के हालात को देखते हुए पानी की उपलब्धता, खेती की योजना और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल का जायजा लिया गया।

राज्य सरकार के अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक में पीने के पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करने, पशुधन की सुरक्षा करने और आपातकालीन योजना के जरिए किसानों की मदद करने पर ध्यान दिया गया। बैठक में कृषि, सिंचाई, जलापूर्ति, नर्मदा, वन और राजस्व विभागों के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।

राज्य के प्रवक्ता और कृषि मंत्री जीतू वाघाणी ने कहा कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) द्वारा ‘अल नीनो’ की संभावना के पूर्वानुमान को देखते हुए प्रशासन मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में तालमेल के साथ काम कर रहा है।

उन्होंने कहा, “बारिश में उतार-चढ़ाव से जुड़े संभावित जोखिमों से निपटने के लिए सभी विभागों में एकीकृत माइक्रो-लेवल प्लानिंग (सूक्ष्म-स्तरीय योजना) लागू की गई है।”

बैठक में एक अहम फैसला यह लिया गया कि नर्मदा पाइपलाइन के पानी से गांवों और तालुकाओं की झीलों को भरने के दायरे को बढ़ाया जाए।

पहले, पाइपलाइन के तीन किलोमीटर के दायरे में आने वाली झीलें ही भरने के लिए पात्र थीं; अब इस सीमा को बढ़ाकर सात किलोमीटर कर दिया गया है।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि मौजूदा जल प्रबंधन व्यवस्था के तहत उत्तर गुजरात में 300 से ज्यादा झीलों को भरा जाए, जबकि सौराष्ट्र में जलाशयों को एसएयूएनआई योजना के तहत भरा जाए।

अधिकारियों ने बताया कि समीक्षा में सरदार सरोवर बांध और राज्य भर के अन्य जलाशयों की स्थिति पर भी चर्चा की गई। साथ ही, पीने के पानी की कमी को रोकने के लिए जलापूर्ति कार्यों को नर्मदा नेटवर्क के साथ और बेहतर ढंग से जोड़ने के निर्देश दिए गए।

कृषि क्षेत्र के बारे में सरकार ने कहा कि खरीफ 2026 सीजन के लिए बीज और उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था है।

किसानों को कम समय में तैयार होने वाली और कम पानी की खपत वाली फसलें उगाने के लिए प्रेरित करने के लिए एक आपातकालीन फसल योजना तैयार की गई है। इसमें कृषि विभागों और विश्वविद्यालयों द्वारा जारी वैज्ञानिक सलाहों का भी सहयोग लिया जा रहा है।

कृषि विभाग मिट्टी में नमी के स्तर और फसल की सेहत पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट-आधारित निगरानी का भी इस्तेमाल कर रहा है।

इसके अलावा, 50 लाख से ज्यादा किसानों को एआई-सक्षम ‘कृषि प्रगति’ प्लेटफॉर्म के जरिए मौसम की ताजा जानकारी और कृषि संबंधी सलाहें मोबाइल फोन पर एसएमएस के माध्यम से मिल रही हैं।

पशुधन प्रबंधन के संबंध में, राज्य ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे चारे का पर्याप्त भंडार बनाए रखें और खराब मौसम की स्थिति के लिए पहले से ही तैयारी रखें।

अधिकारियों ने बताया कि मौजूदा बफर स्टॉक दो साल तक के लिए काफी है। राजस्व विभाग को निर्देश दिया गया है कि वह जिला प्रशासन के साथ लगातार तालमेल बनाए रखे और स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखे। सरकार ने ऐतिहासिक डेटा का भी हवाला दिया, जिससे पता चलता है कि गुजरात में 2000 और 2026 के बीच आठ खरीफ सीजन ‘अल नीनो’ वाले साल रहे।

अधिकारियों ने बताया कि ‘अल नीनो’ वाले सभी सालों में बारिश सामान्य से कम नहीं हुई है; उन्होंने 2006 और 2023 का उदाहरण दिया, जब मजबूत ‘अल नीनो’ स्थितियों के बावजूद राज्य में 117 प्रतिशत बारिश दर्ज की गई थी।

उन्होंने कहा, “घबराने की कोई जरूरत नहीं है; नागरिकों को आधिकारिक निर्देशों का पालन करना चाहिए और गलत जानकारी से बचना चाहिए।”

–आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी


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