'ऐसी तारीफ का क्या फायदा', ट्रंप की ओर से पीएम मोदी की तारीफ पर हुसैन दलवई की प्रतिक्रिया


मुंबई, 18 जून (आईएएनएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ किए जाने पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई की प्रतिक्रिया सामने आई है।

आईएएनएस से बातचीत करते हुए ट्रंप की ओर से पीएम मोदी की तारीफ पर हुसैन दलवई ने कहा कि ऐसी तारीफ का क्या फायदा? आप सिर्फ प्रधानमंत्री की तारीफ करते हैं, लेकिन यहां ज्यादा टैक्स लगाते हैं। अगर यहां सामान लाया जाता है, तो ज्यादा टैक्स लगता है। आप यहां से चीजें मुफ्त में ले जाते हैं। प्रधानमंत्री को इन सब बातों पर सवाल उठाना चाहिए। हमारे नाविक प्रभावित हुए हैं, उसका क्या? अगर ऐसे सवाल उठाए जाएं, तो तारीफ नहीं होगी। तारीफ क्यों हो रही है? क्योंकि कोई सवाल नहीं पूछा जा रहा है।

शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की ओर से पार्टी छोड़ने की खबरों पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा कि पांच लोग तो पहले ही जा चुके हैं, और छठा व्यक्ति भी ठीक से नहीं मिल रहा है; आगे क्या होगा, कोई नहीं जानता। अगर आपको जाना ही है, तो इस्तीफा दें और भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ें। उनमें ऐसा करने की हिम्मत क्यों नहीं है? लोगों ने आपको यह सोचकर वोट दिया था कि आप शिवसेना के साथ रहेंगे, और आप उस भरोसे को तोड़ रहे हैं। यह धोखा है और कुछ नहीं। ऐसी राजनीति पूरी तरह गलत है।

हुसैन दलवई ने कहा, “अलग-अलग लोग अलग-अलग राय रख रहे हैं कि उद्धव जी और बालासाहेब के काम करने के तरीके में अब फर्क आ गया है। पहले लोग डरते थे, लेकिन अब नहीं डरते; कुछ लोग ऐसा कह रहे हैं। हालांकि, मेरा मानना ​​है कि उद्धव संविधान के मुताबिक काम कर रहे हैं और लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे कदमों से अपनी मनमर्जी चलाना चाहती है और अलग-अलग विपक्षी पार्टियों के सांसदों को तोड़ने की कोशिशें हो रही हैं। लेकिन मैं साफ कर दूं कि कांग्रेस में बिल्कुल भी फूट नहीं पड़ी है। कांग्रेस बहुत मजबूत है और लोगों को लगता है कि आखिरकार कांग्रेस ही नतीजे देगी। महा विकास अघाड़ी एकजुट रहेगी और 2029 के चुनाव इसी गठबंधन के तहत लड़े जाएंगे। भाजपा जानती है कि वह किसी भी हाल में 2029 में सत्ता में नहीं आ सकती, इसीलिए तोड़ने और अस्थिर करने की ऐसी कोशिशें की जा रही हैं।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के बयान पर कांग्रेस नेता हुसैन दलवई ने कहा, “मुझे लगता है कि यह सिर्फ उनकी घबराहट या डर पैदा करने की आदत है। चूंकि वहां चुनाव नजदीक हैं, इसलिए यह समाजवादी पार्टी को कमजोर करने की एक रणनीति है। उनके मन में एक-पार्टी के शासन का विचार है, जो संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। वे जो कहते हैं, उससे उनकी अलोकतांत्रिक सोच का पता चलता है। आरएसएस की विचारधारा में 1925 से ही इस तरह की सोच रही है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि देश की जनता इसे स्वीकार करेगी।

–आईएएनएस

एसडी/एएस


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