यूपी में बिजली संकट पर सपा का निशाना, कहा- ऊर्जा मंत्री को विभागीय फैसलों की जानकारी नहीं


लखनऊ, 11 जून (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता आशुतोष वर्मा ने उत्तर प्रदेश में बढ़ती बिजली समस्याओं को लेकर योगी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में लोग गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं। कई स्थानों पर दो-दो और तीन-तीन दिनों तक बिजली आपूर्ति बाधित रहने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे आम जनता परेशान है और सरकार नदारद नजर आ रही है।

अशुतोष वर्मा ने आरोप लगाया कि राज्य के ऊर्जा मंत्री को अपने ही विभाग की स्थिति की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा कि बिजली दरों में बढ़ोतरी जैसे महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी तक मंत्री को नहीं थी, जिससे सरकार के भीतर समन्वय की कमी उजागर होती है। उन्होंने दावा किया कि समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान प्रदेश में पूर्वांचल से लेकर पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तर से दक्षिण तक कई तापीय ऊर्जा परियोजनाएं स्थापित की गई थीं, जिनका लाभ आज भी प्रदेश को मिल रहा है।

उन्होंने जनता से अपील करते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि उत्तर प्रदेश के लोग ऐसी सरकार चुनें जो प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित कर सके और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता दे। उनका आरोप था कि वर्तमान सरकार जनता की समस्याओं के बजाय राजनीतिक प्रचार और विपक्ष की आलोचना में अधिक व्यस्त है।

सपा प्रवक्ता ने कहा कि भारत की विविधता उसकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई समुदाय सदियों से साथ रहते आए हैं और सामाजिक सौहार्द बनाए रखते आए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वास्तविक मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए समय-समय पर विवादास्पद विषयों को सामने लाती है। उनके अनुसार जब बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य या भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सवाल उठते हैं, तब जनता का ध्यान दूसरी तरफ मोड़ने की कोशिश की जाती है।

उन्होंने दावा किया कि स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े कथित घोटालों और प्रशासनिक विफलताओं जैसे मुद्दों को दबाने के लिए धार्मिक या सांप्रदायिक बहसों को बढ़ावा दिया जाता है। वर्मा ने कहा कि जनता अब इन राजनीतिक रणनीतियों को समझने लगी है और मूलभूत मुद्दों पर जवाब मांग रही है।

जम्मू-कश्मीर के संदर्भ में फारूक अब्‍दुल्‍ला के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अशुतोष वर्मा ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताया। उन्होंने कहा कि फारूक अब्दुल्ला स्वयं भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा रहे हैं और कई महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। ऐसे में उनके द्वारा दिए गए इस प्रकार के बयान उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि भारत के लोकतांत्रिक ढांचे और संवैधानिक व्यवस्था का सम्मान किया जाना चाहिए तथा विभाजनकारी बयानबाजी से बचना चाहिए।

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संबंधों पर भी उन्होंने अपनी राय रखी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय द्वारा कांग्रेस को “बरगद का पेड़” बताए जाने वाले बयान पर उन्होंने कहा कि हर राजनीतिक दल को अपनी पार्टी के बारे में सकारात्मक सोच रखने का अधिकार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में पिछले तीन दशकों के दौरान भाजपा के खिलाफ यदि कोई प्रमुख क्षेत्रीय ताकत मजबूती से खड़ी रही है तो वह समाजवादी पार्टी रही है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस का राज्य में अपना स्थान है, लेकिन समाजवादी पार्टी का भी स्वतंत्र राजनीतिक अस्तित्व और जनाधार है। वर्मा ने जोर देकर कहा कि दोनों दलों ने 2024 के लोकसभा चुनाव में मिलकर भाजपा को कड़ी चुनौती दी थी और आगे भी शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर सहयोग जारी रहेगा।

उन्होंने विश्वास जताया कि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन 2027 के विधानसभा चुनाव में भी भाजपा के खिलाफ मजबूती से चुनाव लड़ेगा। उनके अनुसार जनता मौजूदा शासन से असंतुष्ट है और आने वाले समय में राजनीतिक बदलाव की संभावना बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रशासन, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याण के मुद्दों को केंद्र में लाना है।

–आईएएनएस

पीआईएम/डीकेपी


Show More
Back to top button