भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब वैश्विक कहानी बन चुका है: आईजीआईसी की सह-संस्थापक

नई दिल्ली, 10 जून (आईएएनएस)। इंडिया ग्लोबल इनोवेशन कनेक्ट (आईजीआईसी) की सह-संस्थापक याएल स्माडजा ने भारतीय स्टार्टअप की सराहना की है। दिल्ली में आयोजित आईजीआईसी कार्यक्रम में शामिल होने आई स्माडजा ने कहा कि यहां का स्टार्टअप अब वैश्विक कहानी बन चुका है।
आईएएनएस से बात करते हुए आईजीआईसी की सह संस्थापक ने कहा, “भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम अब केवल भारत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है।” उन्होंने कहा कि आईजीआईसी का उद्देश्य भारतीय स्टार्टअप और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को दुनिया के अन्य देशों के इनोवेशन नेटवर्क से जोड़ना है।
स्माडजा ने कहा, “भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम अब सिर्फ भारत की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक कहानी बन चुका है। आईजीआईसी का मूल उद्देश्य भारतीय नवाचार तंत्र को विदेशी इकोसिस्टम के साथ जोड़ना और उनके बीच सहयोग के नए अवसर पैदा करना है।”
उन्होंने बताया कि इस वर्ष पहली बार आईजीआईसी का आयोजन नई दिल्ली में किया जा रहा है, जिसे लेकर आयोजक बेहद उत्साहित हैं। कहा कि इस बार कार्यक्रम में भारत सरकार की भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है, जिससे इस पहल को और अधिक मजबूती मिलेगी।
याएल स्माडजा ने कहा कि इस मंच पर विभिन्न हितधारकों, उद्योग प्रतिनिधियों, उद्यमियों, निवेशकों और विदेशी स्टार्टअप इकोसिस्टम के प्रतिनिधियों को एक साथ लाया गया है। इससे नवाचार, निवेश, तकनीकी सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा।
उन्होंने विश्वास जताया कि भारत और दुनिया के अन्य देशों के बीच स्टार्टअप सहयोग को मजबूत करने में आईजीआईसी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और यह मंच वैश्विक नवाचार साझेदारी के नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगा।
दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय (10-11 जून) कार्यक्रम में तकनीकी दुनिया के तमाम जानकार एकत्रित होंगे। आधिकारिक वेबसाइट में दी गई जानकारी के अनुसार, दुनिया तेजी से एक बहुध्रुवीय (मल्टीपोलर) तकनीकी और नवाचार व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जिसका असर केवल अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि भू-राजनीति, सुरक्षा और सामाजिक ढांचे पर भी गहराई से पड़ रहा है। इसी बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच विशेषज्ञों का एक पैनल तकनीकी नवाचार के नए वैश्विक संतुलन और उसमें भारत की भूमिका पर चर्चा करेगा।
चर्चा के दौरान अमेरिका और चीन के बीच तकनीकी क्षमताओं के बदलते संतुलन का विश्लेषण किया जाएगा। साथ ही यह समझने की कोशिश होगी कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डीप टेक और उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में भारत किस स्थान पर खड़ा है और भविष्य में उसकी भूमिका क्या हो सकती है।
–आईएएनएस
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