स्लोवेनिया के नए विदेश मंत्री बने टोन काइजर, एस जयशंकर ने दी बधाई


नई दिल्ली, 6 जून (आईएएनएस)। भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने टोन काइजर को स्लोवेनिया के विदेश मंत्री का पदभार संभालने पर बधाई दी। उन्होंने उनके साथ काम करने की इच्छा व्यक्त की।

पूर्व राजनयिक टोन काइजर ने गुरुवार शाम आधिकारिक रूप से पद की शपथ ली। इससे पहले सप्ताह की शुरुआत में संसद में उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी गई थी। उन्होंने प्रधानमंत्री जनेज यांसा के नेतृत्व वाली नई दक्षिणपंथी गठबंधन सरकार में विदेश मंत्री का पद संभाला है।

शनिवार को जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “स्लोवेनिया गणराज्य के विदेश मंत्री नियुक्त होने पर टोन काइजर को हार्दिक बधाई। उनके साथ मिलकर काम करने को उत्सुक हूं।”

टोन काइजर को कूटनीतिक सेवा में 30 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने 1995 में स्लोवेनिया के विदेश मंत्रालय में अपने करियर की शुरुआत की थी। अपने लंबे कार्यकाल के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण राजनयिक पदों पर काम किया, जिनमें अमेरिका में स्लोवेनिया के राजदूत का पद भी शामिल है।

उन्होंने अंतरराष्ट्रीय विकास सहयोग, यूरोपीय संघ से जुड़े मामलों और क्षेत्रीय स्थिरता के क्षेत्र में भी अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं। इसके अलावा उन्होंने क्रोएशिया के साथ लंबित द्विपक्षीय मुद्दों पर भी काम किया है।

इससे पहले गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनेज यांसा को स्लोवेनिया का प्रधानमंत्री चुने जाने पर बधाई दी थी। उन्होंने कहा था कि दोनों देशों के लोगों की साझा समृद्धि और आपसी लाभ के लिए भारत-स्लोवेनिया संबंधों को और मजबूत बनाने हेतु वह उनके साथ मिलकर काम करने के इच्छुक हैं।

22 मई को स्लोवेनिया की राष्ट्रीय विधानसभा ने गुप्त मतदान के जरिए जनेज यांसा को प्रधानमंत्री नियुक्त किया था। 90 सदस्यीय संसद में उन्हें 51 वोटों का समर्थन मिला। वह चौथी बार स्लोवेनिया के प्रधानमंत्री बने हैं, हालांकि उनकी पार्टी स्लोवेनियन डेमोक्रेटिक पार्टी (एसडीएस) मार्च में हुए चुनावों में मामूली अंतर से जीत हासिल नहीं कर सकी थी।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत और स्लोवेनिया के बीच संबंध बेहद सौहार्दपूर्ण, मैत्रीपूर्ण और तेजी से विकसित हो रहे हैं। दोनों देशों के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय साझेदारी पर आधारित हैं।

1992 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से, दोनों देशों की साझेदारी पारंपरिक कूटनीतिक संबंधों से आगे बढ़कर नवाचार, लॉजिस्टिक्स और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर केंद्रित एक आधुनिक और भविष्य-उन्मुख साझेदारी में बदल गई है।

–आईएएनएस

केआर/


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