एक्सप्लेनर: क्या है पीपीआई और थोक महंगाई मापने में डब्ल्यूपीआई से क्यों माना जाता है बेहतर?


नई दिल्ली, 2 जून (आईएएनएस)। लंबी तैयार के बाद केंद्र सरकार की ओर से प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (पीपीआई) को लॉन्च करने का ऐलान मंगलवार को किया। यह आने वाले वर्षों में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) को रिप्लेस करेगा। इसे देश में महंगाई मापने में परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है और इससे सटीक अनुमान लगाने में मदद मिलेगी।

केंद्र सरकार की ओर से 15 जून को डब्ल्यूपीआई और नए पीपीआई को भी जारी किया जाएगा। आइए समझते हैं इन दोनों में अंतर क्या है।

डब्ल्यूपीआई थोक व्यापार के प्रारंभिक चरण में वस्तुओं की कीमतों में होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है। पीपीआई घरेलू उत्पादकों द्वारा अपने उत्पादन के लिए कारखाने या खेत के स्तर पर प्राप्त कीमतों में होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है।

डब्ल्यूपीआई थोक व्यापारियों और थोक बिक्री के प्रारंभिक बिंदु के दृष्टिकोण से महंगाई का आकलन करता है। पीपीआई उत्पादक के दृष्टिकोण से महंगाई का आकलन करता है।

डब्ल्यूपीआई एक ही उत्पाद की गणना कई बार करता है क्योंकि यह एक थोक बिक्री चरण से दूसरे चरण में जाता है। पीपीआई आपूर्ति और उपयोग तालिकाओं का उपयोग करके एकल उत्पादन चरणों में उत्पादों को ट्रैक करता है, जिससे एकाधिक गणना पूरी तरह से समाप्त हो जाती है।

डब्ल्यूपीआई लेनदेन में अकसर थोक स्तर तक वितरण लागत और अप्रत्यक्ष कर शामिल होते हैं। पीपीआई (विशेष रूप से मूल मूल्य निर्धारण) में कर और व्यापार/परिवहन मार्जिन को शामिल नहीं किया जाता है ताकि उत्पादक को प्राप्त होने वाली सटीक राशि का पता चल सके।

पीपीआई इनपुट इंडेक्स (विनिर्माताओं द्वारा सामग्रियों के लिए भुगतान की गई राशि) और आउटपुट इंडेक्स (वे अपने उत्पादों के लिए जो कीमत वसूलते हैं) दोनों प्रदान करता है, जिससे आपूर्ति श्रृंखला में मूल्य दबाव किस प्रकार फैलता है, इसका सटीक पता करने में मदद मिलती है।

इसके अतिरिक्त, सरकार की ओर से पीपीआई को लागू करने का उद्देश्य भारतीय डेटा को ग्लोबल स्टैडर्ड के मुताबिक ढालना है।

–आईएएनएस

एबीएस


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