ऑस्ट्रेलिया ने वेस्ट बैंक में सेटलर हिंसा को लेकर तीन इजरायली व्यक्तियों और चार संस्थाओं पर लगाए प्रतिबंध

कैनबरा, 2 जून (आईएएनएस)। ऑस्ट्रेलिया सरकार ने मंगलवार को तीन इजरायली व्यक्तियों और चार संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए हैं। यह कदम वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ बढ़ती सेटलर हिंसा के जवाब में उठाया गया है।
विदेश मंत्री पेनी वोंग ने एक बयान में कहा कि वेस्ट बैंक में सेटलर हिंसा इजरायल की सुरक्षा और दुनिया में उसकी छवि दोनों को नुकसान पहुंचाती है।
सिन्हुआ समाचार एजेंसी के अनुसार, वोंग ने बताया कि इन व्यक्तियों और संस्थाओं पर वित्तीय प्रतिबंध लगाए जाएंगे। इसका मतलब है कि ऑस्ट्रेलियाई लोग उन्हें कोई पैसा या संपत्ति नहीं दे सकेंगे। साथ ही इन व्यक्तियों के ऑस्ट्रेलिया आने पर भी रोक लगा दी जाएगी।
वोंग ने कहा, “जिन संस्थाओं को सूची में शामिल किया गया है, उनमें ऐसे कृषि आउटपोस्ट भी हैं जो सेटलर हिंसा के केंद्र के रूप में काम करते हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “सेटलर हिंसा का इस्तेमाल फिलिस्तीनियों को उनके घरों से हटाने और बस्ती विस्तार को आगे बढ़ाने के लिए किया जाता है। इसमें संपत्ति का नुकसान, परिवारों को जबरन हटाना, मारपीट, यौन हिंसा और यातना शामिल हैं, जिससे गंभीर चोटें और मौतें तक होती हैं।”
वोंग ने यह भी कहा कि ऑस्ट्रेलिया ने इस कदम में न्यूजीलैंड सहित अपने साझेदार देशों के साथ मिलकर काम किया है। उन्होंने कहा कि ये प्रतिबंध इजरायल और फिलिस्तीन दोनों की सुरक्षा और भविष्य के प्रति ऑस्ट्रेलिया की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने मई में ब्रिटेन, इटली, फ्रांस, जर्मनी, कनाडा, नॉर्वे, नीदरलैंड और न्यूजीलैंड के नेताओं के साथ मिलकर वेस्ट बैंक में बढ़ती इजरायली बस्ती गतिविधियों को रोकने की अपील की थी।
ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि वेस्ट बैंक की स्थिति ‘काफी बिगड़ चुकी है’ और सेटलर हिंसा बहुत ज़्यादा हो गई है।
नेताओं ने कहा कि वेस्ट बैंक में इजरायली बस्तियां अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार अवैध हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ई-1 इलाके में निर्माण से वेस्ट बैंक दो हिस्सों में बंट जाएगा और यह अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन होगा।
उन्होंने कंपनियों से अपील की कि वे ई-1 या अन्य बस्ती विकास परियोजनाओं के निर्माण टेंडर में भाग न लें, क्योंकि इससे कानूनी और प्रतिष्ठा से जुड़े जोखिम हो सकते हैं।
इस बयान में दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन दोहराया गया, जिसमें इजरायल और फिलिस्तीन को शांति और सुरक्षा के साथ एक-दूसरे के साथ रहने की बात कही गई है।
–आईएएनएस
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