न्यू नोएडा को मिलेगी एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी, 72 किमी लिंक एक्सप्रेसवे से जुड़ेंगे गांव और सेक्टर

ग्रेटर नोएडा, 1 जून (आईएएनएस)। तेजी से विकसित हो रहे न्यू नोएडा (डीएनजीआईआर) को जल्द ही नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी मिलने जा रही है। इसके लिए गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे को जोड़ने वाले करीब 72 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेसवे की योजना तैयार की गई है। यह एक्सप्रेसवे बुलंदशहर होते हुए गुजरेगा और इसका बड़ा हिस्सा न्यू नोएडा के प्रस्तावित क्षेत्र एवं गांवों से होकर निकलेगा। इससे क्षेत्र के लाखों लोगों को बेहतर यातायात सुविधाएं मिलेंगी और एयरपोर्ट तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा।
नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (एसीईओ) सतीश पाल ने बताया कि प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेसवे पर एक रोटरी विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिससे न्यू नोएडा को सीधे इस मार्ग से जोड़ा जा सके। यह प्रस्ताव जल्द ही प्राधिकरण बोर्ड की बैठक में रखा जाएगा। रोटरी बनने के बाद न्यू नोएडा के अधिकांश गांवों और प्रस्तावित सेक्टरों की सीधी पहुंच लिंक एक्सप्रेसवे तक हो जाएगी, जिससे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा।
प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर ने बताया कि ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के आसपास जहां सड़कें पहले से मौजूद हैं, वहीं किसानों से आपसी सहमति के आधार पर भूमि अधिग्रहण किया जाएगा। इसी क्षेत्र में न्यू नोएडा का साइट कार्यालय भी स्थापित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों की वर्तमान चौड़ाई 18 मीटर है, उन्हें मास्टर प्लान के अनुसार 24 मीटर तक विस्तारित किया जाएगा। इसके लिए आसपास के गांवों की जमीन ली जाएगी।
प्राधिकरण का कहना है कि न्यू नोएडा और वर्तमान नोएडा के बीच बेहतर संपर्क स्थापित करना सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में शामिल है। इसके लिए भविष्य में नए लिंक रोड विकसित किए जा सकते हैं, जिससे न्यू नोएडा की आंतरिक सड़कें सीधे नोएडा से जुड़ सकें। न्यू नोएडा परियोजना कुल 209.11 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विकसित की जाएगी। इसे चार चरणों में पूरा करने की योजना है।
पहले चरण (2023-27) में 3165 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जाएगा। इसके बाद 2027 से 2032 तक 3798 हेक्टेयर, 2032 से 2037 तक 5908 हेक्टेयर और अंतिम चरण 2037 से 2041 तक 8230 हेक्टेयर भूमि पर विकास कार्य किए जाएंगे।
भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों के लिए मुआवजा दर भी तय कर दी गई है। किसानों को 4300 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा दिया जाएगा। वहीं जो किसान 7 प्रतिशत विकसित भूखंड लेने का विकल्प चुनेंगे, उन्हें 3800 रुपए प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा मिलेगा।
प्राधिकरण का मानना है कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक, आवासीय और आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी।
–आईएएनएस
पीकेटी/डीकेपी