इटली में इबोला का संदिग्ध मामला, कांगो से लौटे मरीज को आइसोलेशन में रखा गया
रोम, 1 जून (आईएएनएस)। इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि कैग्लियारी में इबोला के एक संदिग्ध मामले की जांच चल रही है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, यह मरीज हाल ही में कांगो से लौटा था और इस समय सार्डिनिया की राजधानी में मौजूद है।
मरीज में बीमारी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं और उसका इबोला टेस्ट किया गया है। इस टेस्ट के नमूनों की जांच रोम स्थित स्पालांजानी संस्थान में की जाएगी।
फिलहाल मरीज को अस्पताल में अलग (आइसोलेशन) रखा गया है।
एडनक्रोनोस समाचार एजेंसी की जानकारी के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि वह सार्डिनिया की स्थानीय स्वास्थ्य एजेंसियों और स्पालनजानी संस्थान के संपर्क में है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
मरीज शहर के सैंटिसिमा ट्रिनिटा अस्पताल के संक्रामक रोग विभाग में भर्ती है। वायरस की मौजूदगी की पुष्टि करने के लिए गए नमूनों को एयर एम्बुलेंस के जरिए रोम भेजा गया है।
इस मिरियोनिस अस्पताल में ऐसे मामलों के लिए तय सभी सुरक्षा उपाय लागू कर दिए गए हैं।
प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के कार्यालय ने जानकारी देते हुए बताया कि इटली की सरकार ने यूरोप से भी अपील की है कि इबोला के फैलाव को रोकने के लिए अपनी सीमाओं पर निगरानी और आपसी समन्वय को और मजबूत किया जाए।
प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि इटली, रोम के स्पालनजानी संक्रामक रोग अस्पताल से विशेषज्ञों की एक टीम कांगो भेज रहा है। यह टीम इबोला के प्रकोप से निपटने और वायरस की निगरानी और नियंत्रण को मजबूत करने में मदद करेगी।
बयान में कहा गया, “इटली का मानना है कि मध्य अफ्रीका में हाल ही में कांगो और पड़ोसी देश युगांडा में बंडिबुग्यो इबोला वायरस (बीवीडी स्ट्रेन) के प्रकोप से जुड़ी महामारी की स्थिति पर सबसे अधिक ध्यान देने की जरूरत है।”
इसी वजह से प्रधानमंत्री मेलोनी ने यूरोपीय संघ परिषद के अध्यक्ष निकोस क्रिस्टोडुलिडेस, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन को पत्र लिखा है।
इसका उद्देश्य यह आग्रह करना है कि स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े राष्ट्रीय अधिकारों का सम्मान करते हुए, प्रभावित इलाकों से सीधे या परोक्ष रूप से आने वाले लोगों की निगरानी के लिए साझा नियम बनाए जाएं और सीमा निगरानी में बेहतर समन्वय किया जाए।
बयान में कहा गया कि इससे यूरोप भर में सुरक्षा उपायों को और मजबूत करने में मदद मिलेगी।
–आईएएनएस
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