बुधवार को गणपति की आराधना को समर्पित वरदा चतुर्थी, विजय मुहूर्त के साथ रवि योग, नोट कर लें भद्रा का समय


नई दिल्ली, 19 मई (आईएएनएस)। सनातन धर्म में अधिक मास को बेहद पवित्र मास माना जाता है। इस मास की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को वरदा चतुर्थी के नाम से वर्णित किया गया है। यह तिथि विघ्न विनाशन भगवान श्री गणेश की आराधना के लिए विशेष रूप से समर्पित है। 20 मई 2026 (बुधवार) को यह शुभ वरदा चतुर्थी मनाई जाएगी।

धर्म शास्त्रों के अनुसार, अधिक मास लगभग हर तीन वर्ष में आता है। इसमें प्रत्येक तिथि का अपना महत्व होता है। वहीं, इस मास की शुक्ल चतुर्थी पर गणेश जी की पूजा-अर्चना करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। अधिक मास की चतुर्थी पर गणेश आराधना से सभी बाधाएं दूर होती हैं और गणपति का वरदान प्राप्त होता है।

20 मई को सूर्योदय 5 बजकर 28 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 7 बजकर 8 मिनट पर होगा। चन्द्रोदय सुबह 8 बजकर 43 मिनट पर और चन्द्रास्त रात 11 बजकर 8 मिनट पर होगा।

बुधवार के शुभ मुहूर्त की बात करें तो रवि योग सुबह 5 बजकर 28 मिनट से 6 बजकर 11 मिनट तक रहेगा। इस योग में किया गया कोई भी शुभ कार्य और गणेश पूजन विशेष फलदायी होता है। अभिजीत मुहूर्त कल उपलब्ध नहीं है, लेकिन विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 34 मिनट से 3 बजकर 29 मिनट तक रहेगा। गोधूलि मुहूर्त शाम 7 बजकर 6 मिनट से 7 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। वहीं, ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 5 मिनट से 4 बजकर 46 मिनट तक रहेगा।

वरदा चतुर्थी पर शुभ समय के साथ ही अशुभ समय का विचार भी महत्वपूर्ण है। इस दिन भद्रा सुबह 5 बजकर 28 मिनट से 11 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। शास्त्रों के अनुसार भद्रा काल में कोई शुभ, नया कार्य या पूजन नहीं करना चाहिए। राहुकाल दोपहर 12 बजकर 18 मिनट से 2 बजे तक रहेगा। यमगण्ड सुबह 7 बजकर 10 मिनट से 8 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। साथ ही गुलिक काल सुबह 10 बजकर 35 मिनट से दोपहर 12 बजकर 18 मिनट तक रहेगा।

–आईएएनएस

एमटी/एएस


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