मणिपुर: मोल्नोई गांव में आग लगने से भारत-म्यांमार सीमा पर तनाव बढ़ा


कामजोंग, 12 मई (आईएएनएस)। मणिपुर के कामजोंग जिले और म्यांमार के बीच स्थित अस्थिर सीमा पर बसे कुकी समुदाय के गांव मोल्नोई में आग लगने की घटना के बाद विरोधाभासी खबरें और तीखे आरोप सामने आए हैं। इस घटना ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है, जहां स्थानीय समुदाय के नेताओं ने तुरंत इन दावों का खंडन किया और आधिकारिक सूत्रों ने स्पष्टीकरण जारी किया।

मंगलवार दोपहर को सोशल मीडिया पर खबरें फैलने लगीं कि एनएससीएन (पूर्वी मोर्चा) से जुड़े उग्रवादियों ने सीमा पार कर मोल्नोई गांव में आग लगा दी। कुकी समुदाय के सोशल मीडिया हैंडल्स पर शुरुआती दावों में कहा गया कि यह हमला सीमा क्षेत्र में उनके समुदाय को निशाना बनाकर किया गया था।

सरकारी अधिकारियों ने हिंसा के भारतीय धरती पर होने की अफवाहों को खारिज करते हुए तुरंत कार्रवाई की। अधिकारियों ने पुष्टि की कि मोल्नोई कुकी गांव पूरी तरह से म्यांमार के भीतर स्थित है, जो सीमा स्तंभ (बीपी) संख्या 113 से लगभग 2 किलोमीटर दूर है। आधिकारिक रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह घटना भारत से संबंधित नहीं है। यह घटना म्यांमार का आंतरिक मामला है।

मंगलवार की देर रात जारी एक औपचारिक प्रेस विज्ञप्ति में पूर्वी कमान के नागा ग्राम रक्षक दल (एनवीजी) ने हमले में तांगखुल नागा समुदाय की किसी भी संलिप्तता से स्पष्ट रूप से इनकार किया। एनवीजी ने सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों को निराधार और तांगखुल समुदाय की छवि खराब करने का प्रयास बताया। बयान में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि मोल्नोई कथित तौर पर कुकी नेशनल आर्मी-बर्मा (केएनए-बी) का एक केंद्र है, जो वर्तमान में म्यांमार के सैन्य जुंटा के साथ संघर्ष में शामिल समूह है।

एनवीजी ने कहा कि कुकी गांव मोल्नोई पर हमला म्यांमार में चल रही आंतरिक अशांति का परिणाम हो सकता है, इसलिए पूर्वी कमान के नागा ग्राम रक्षक इस निराधार आरोप को खारिज करते हैं और तंगखुल नागा समुदाय की छवि को धूमिल करने के प्रयास की निंदा करते हैं।

एनवीजी ने सुझाव दिया कि आगजनी सीमा पार जातीय संघर्ष के बजाय म्यांमार के चल रहे गृहयुद्ध का परिणाम थी और संकेत दिया कि ये आरोप नागा सीमावर्ती गांवों पर भविष्य के हमलों को उचित ठहराने की साजिश हो सकते हैं।

–आईएएनएस

ओपी/डीकेपी


Show More
Back to top button