पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत कर्नाटक को मिलेंगे 1,243 नए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर

बेंगलुरु, 12 मई (आईएएनएस)। केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने मंगलवार को कर्नाटक में पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत 123.26 करोड़ रुपए में 1,243 ईवी चार्जर स्थापित करने से संबंधित प्रस्तावों को मंजूरी देने की घोषणा की।
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत देशव्यापी ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को सक्षम बनाने पर एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि बेंगलुरु भारत के अग्रणी ईवी चार्जिंग हब में से एक के रूप में उभरा है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि विभिन्न राज्यों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में 4,874 इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर लगाने के लिए अब तक 503.86 करोड़ रुपए के प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। स्वीकृत प्रस्तावों में सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां एचपीसीएल, आईओसीएल और बीपीसीएल, साथ ही राजस्थान, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, केरल, तेलंगाना, कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे राज्यों के प्रस्ताव शामिल हैं।
कुमारस्वामी ने कहा कि भारत 2047 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित रहते हुए विकसित भारत के विजन की ओर लगातार आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री द्वारा स्थिरता, नवाचार और व्यापकता पर दिए गए जोर ने भारत के गतिशीलता और ऊर्जा के दृष्टिकोण को मौलिक रूप से बदल दिया है।
मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत का ऑटोमोटिव क्षेत्र देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है, विनिर्माण जीडीपी का लगभग आधा हिस्सा है और लगभग 3 करोड़ लोगों की आजीविका का सहारा है, जो इसे भारत के स्वच्छ गतिशीलता परिवर्तन के लिए केंद्रीय बनाता है।
केंद्रीय मंत्री ने देश भर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने में बीपीसीएल, आईओसीएल और एचपीसीएल सहित सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों के योगदान को भी स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि एफएएमई-द्वितीय योजना के तहत तेल कंपनियों ने भारी उद्योग मंत्रालय से 873.5 करोड़ रुपए की सब्सिडी सहायता से देश भर में 8,932 ईवी चार्जर स्थापित किए हैं। इनमें से अकेले कर्नाटक में 721 चार्जर स्थापित किए गए हैं।
कुमारस्वामी ने टाटा पावर, चार्जजोन और महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी चार्ज प्वाइंट ऑपरेटरों और उद्योग जगत की कंपनियों द्वारा नवाचार और क्रियान्वयन क्षमताओं के माध्यम से भारत के ईवी इकोसिस्टम को मजबूत करने में निभाई गई भूमिका की भी सराहना की।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय एकीकृत ईवी चार्जिंग ऐप, यूनिफाइड भारत ई-चार्ज (यूबीसी) पर काम चल रहा है। इस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य ईवी उपयोगकर्ताओं को एक ही विश्वसनीय इंटरफेस के माध्यम से कई ऑपरेटरों के चार्जिंग नेटवर्क को खोजने, उपयोग करने और भुगतान करने में सक्षम बनाना है।
डिजिटल भुगतान में यूपीआई के परिवर्तन से इसके संभावित प्रभाव की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल भारत के ईवी चार्जिंग इकोसिस्टम को काफी मजबूत करेगी।
मंत्री ने भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा भारत को भविष्य की गतिशीलता प्रौद्योगिकियों के वैश्विक केंद्र के रूप में मजबूत करने के लिए शुरू की गई कई प्रमुख पहलों पर भी प्रकाश डाला। इनमें बैटरी सेल निर्माण के लिए 18,100 करोड़ रुपए की पीएलआई एसीसी योजना, इलेक्ट्रिक वाहनों और हाइड्रोजन-चालित वाहनों सहित स्वच्छ वाहनों को बढ़ावा देने वाली 25,938 करोड़ रुपए की पीएलआई ऑटो योजना और दुर्लभ पृथ्वी चुंबक निर्माण में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के उद्देश्य से हाल ही में शुरू की गई 7,280 करोड़ रुपए की आरईपीएम योजना शामिल हैं।
पीएम ई-ड्राइव योजना को भारत के इलेक्ट्रिक वाहन परिवर्तन की आधारशिला बताते हुए कुमारस्वामी ने कहा कि 10,900 करोड़ रुपए की यह पहल इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, बसों और ट्रकों को अपनाने में तेजी ला रही है और साथ ही साथ एक मजबूत राष्ट्रव्यापी इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग बुनियादी ढांचा तैयार कर रही है।
उन्होंने आगे कहा कि पूरे देश में इलेक्ट्रिक वाहन सार्वजनिक चार्जिंग बुनियादी ढांचे के विस्तार के लिए विशेष रूप से 2,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।
कुमारस्वामी ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय, विद्युत मंत्रालय, राज्य सरकारों और उद्योग जगत के हितधारकों के समन्वय से, देश में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तीव्र वृद्धि को समर्थन देने के लिए ग्रिड की तैयारी, मानकीकरण और डिजिटल एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है।
–आईएएनएस
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