कराची से महिला के अपहरण पर बीवाईसी नेता सबीहा बलूच ने पाकिस्तानी सेना की न‍िंदा की


क्वेटा, 21 अप्रैल (आईएएनएस)। बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) की नेता सबीहा बलूच ने पाकिस्तानी सेना के व‍िरोध में आवाज उठाते हुए बलूच महिला को गायब करने का आरोप लगाया। नेता सबीहा ने सेना की कड़ी निंदा करते हुए इसे एक बढ़ते व्यवस्थित पैटर्न का हिस्सा बताया है।

बलूच कार्यकर्ता ने बताया कि एक गृह‍िणी हसीना बलूच को 16 अप्रैल की रात कराची में उनके घर से अगवा कर लिया गया था। उन्होंने कहा कि बलूच महिलाओं का गायब होना अब कोई असामान्य घटना नहीं रह गई है, बल्कि यह एक सोची-समझी नीति का ह‍िस्‍सा है।

इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए सबीहा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्‍स’ पर पोस्ट किया, “इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय कानून बिल्कुल साफ है। जबरन गायब करना मानवता के खिलाफ अपराध है। किसी व्यक्ति से गुप्त और बिना संपर्क वाली हिरासत में लिया गया बयान या कबूलनामा कानूनी तौर पर बेकार होता है। यह सब दबाव में लिया जाता है, सबूत नहीं होता।”

उन्होंने आगे कहा कि ‘जबरन गायब होने से सभी व्यक्तियों की सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र घोषणा’, ‘नागरिक और राजनीतिक अधिकारों पर अंतर्राष्ट्रीय अनुबंध’ (आईसीसीपीआर), और पाकिस्तान का संविधान स्पष्ट रूप से ऐसी प्रथाओं पर रोक लगाते हैं।

सबीहा ने कहा क‍ि इतने साफ कानून होने के बावजूद, जिम्मेदार लोग जवाबदेही से बच रहे हैं और उल्टा बीवाईसी, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और इन मुद्दों को उठाने वालों के खिलाफ प्रचार अभियान चला रहे हैं।

सबीहा ने हसीना की तुरंत और बिना शर्त रिहाई की मांग करते हुए कहा, “यह साफ-साफ कह देना जरूरी है: कोई भी बदनाम करने की कोशिश हमें चुप नहीं करा सकती। हम सच्चाई को सामने लाते रहेंगे और बोलते रहेंगे।”

बलोच वीमेन फोरम (बीडब्‍ल्‍यूएफ) ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि बिना किसी कानूनी प्रक्रिया और पारदर्शिता के इस तरह लोगों को उठाया जाना बहुत गंभीर कानूनी और इंसानी चिंता का विषय है।

बीडब्‍ल्‍यूएफ ने कहा, “बलोच महिलाओं के बढ़ते अपहरण और जबरन गायब किए जाने के मामले एक खतरनाक स्थिति दिखाते हैं। ये न सिर्फ मानवाधिकारों का उल्लंघन हैं, बल्कि परिवारों को लंबे समय तक दर्द, डर और अनिश्चितता में छोड़ देते हैं, जहां उन्हें न न्याय मिलता है, न जवाबदेही।”

इस संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से अपील की कि वे कानून का पालन करें और खासकर महिलाओं के साथ इस तरह के गैरकानूनी काम न हों। अब समय आ गया है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन इस बढ़ती समस्या को गंभीरता से लें और इस पर ध्यान दें।

–आईएएनएस

एवाई/डीकेपी


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