झारखंडः हजारीबाग और बोकारो के बाद रांची कोषागार में भी घोटालेबाजों ने लगाई सेंध, तीन करोड़ का गबन, एफआईआर दर्ज

रांची, 14 अप्रैल (आईएएनएस)। झारखंड में कोषागारों से फर्जी निकासी के सिलसिले में एक और बड़ा मामला सामने आया है। हजारीबाग और बोकारो के बाद अब रांची ट्रेजरी से भी करीब 3 करोड़ रुपए की अवैध निकासी का खुलासा हुआ है। कांके स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ एनिमल हेल्थ एंड प्रोडक्शन के दो कर्मियों पर वेतन मद में हेरफेर कर 2.94 करोड़ रुपए निकालने का आरोप है।
रांची के उपायुक्त के निर्देश पर कार्यकारी मजिस्ट्रेट मो. जफर हसनात ने कोतवाली थाने में मंगलवार को इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई है। खबर है कि इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो कर्मियों को हिरासत में लिया है।
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, संस्थान के अकाउंटेंट मुनिन्द्र कुमार और कर्मचारी संजीव कुमार ने आपसी मिलीभगत से इस गबन को अंजाम दिया। आरोप है कि मुनिन्द्र कुमार ने अपने दो अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.52 करोड़ रुपए और संजीव कुमार ने अपने खाते में 1.41 करोड़ रुपए अवैध रूप से ट्रांसफर किए।
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वित्तीय वर्ष 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान ‘कुबेर पोर्टल’ पर वेतन बिल में छेड़छाड़ कर दोनों ने अपने वेतन को कृत्रिम रूप से बढ़ाया और निर्धारित सीमा से अधिक राशि जिला कोषागार से निकाल ली। मामले की जांच के लिए गठित टीम ने 13 अप्रैल को अपनी रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें 67 पन्नों के दस्तावेजी साक्ष्य शामिल हैं।
रिपोर्ट में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि आरोपियों ने सरकारी नियमों की अनदेखी कर सुनियोजित तरीके से करोड़ों रुपए का गबन किया। कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने पुलिस को दिए आवेदन में जालसाजी और सरकारी धन के दुरुपयोग के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
उल्लेखनीय है कि राज्य में हाल के दिनों में कोषागारों से फर्जी निकासी के कई मामले उजागर हुए हैं। इससे पहले बोकारो ट्रेजरी में एक सेवानिवृत्त पुलिसकर्मी को दोबारा सेवा में दिखाकर 4.29 करोड़ रुपए की निकासी और हजारीबाग कोषागार से करीब 27 करोड़ रुपए के गबन का मामला सामने आ चुका है।
बोकारो और हजारीबाग के मामलों में अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। लगातार सामने आ रहे इन मामलों के मद्देनजर राज्य सरकार ने सभी 33 ट्रेजरी और सब-ट्रेजरी की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। आशंका जताई जा रही है कि अवैध निकासी की कुल राशि 50 करोड़ रुपए से अधिक हो सकती है। वित्त मंत्री राधा कृष्ण किशोर ने इसे प्रशासनिक निगरानी की गंभीर विफलता करार देते हुए सभी जिलों के उपायुक्तों को वित्तीय अनुशासन सख्त करने और विस्तृत ऑडिट सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
–आईएएनएस
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