नगर निगमों में बनाए जाएगें एनीमल बर्थ कंट्रोल सेंटर

लखनऊ। सड़को में इधर उधर विचारण करने वाले कुत्तों की संख्या पर नियत्रंण करने के लिए राज्य सरकार ने सभी नगर निगमों में एनीमल बर्थ कन्ट्रोल सेन्टर बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए श्वान पशु प्रबंधन मैनुअल जारी की जा चुकी है। यही नही सरकार ने हर जनपद में जिला पशु कू्ररता निवारण समिति बनाने के निर्देश दिए है। प्रमुख सचिव नगर विकास अमृत अभिजात ने स्थानीय निकाय निदेशालय में डॉग मैटर्स पर आयोजित सेमिनार को सम्बोधित करते हुए यह जानकारी दी। इस मौके पर क्षेत्र के विशेषज्ञों ने पालतू और स्ट्रीट डॉग के बारे में विस्तृत जानकारी दी। प्रमुख सचिव ने बताया कि मनुष्य और श्वान के बीच मानव सभ्यता शुरू होने से ही अटूट रिश्ता रहा है। मनुष्य ने अपनी सुरक्षा के लिए श्वानों को पालना शुरू किया। श्वानों को अपने स्वामी के प्रति समर्पण और प्यार की भावना के कारण ही किसानों और औद्योगिक समाजों में भी मानव के पालतू पशुओं में उन्हें महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है। श्वान की औसतन आयु 10 से 15 वर्ष होती है। प्रमुख सचिव ने कहा कि हर जिले में निराक्षित कुत्तों के लिए जिला पशु कू्ररता निवारण समिति बनाई जाएगी। समिति पशुओं को खाना खिलाने और विवाद समाधान के लिए काम करेगी। हर निरकाय में एक पशु चिकित्साधिकारी होगा, जो कुत्तों के बारे में जानकारी रखेगा। पालतू पशुओं को लिफ्ट से ले जाने पर प्रतिबंध नही लगया जा सकेगा। एक रिपोर्ट के अनुसार 20 वीं पशुधन गणना 2019 में भारत में 1.53 करोड़ से अधिक निराश्रित कुत्ते है। इनमें से 20.59 लाख की संख्या यूपी में है। यूपी में 4.22 लाख से अधिक पालतू कुत्ते है।

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