जीका वायरस आमतौर पर डेंगू बुखार जैसा ही है : विशेषज्ञ

नई दिल्ली, 1 जुलाई (आईएएनएस)। महाराष्ट्र के पुणे में हाल ही में जीका वायरस से पांच लोगों की मौत के मामले में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा कि इसके कोई लक्षण नहीं है, यह डेंगू बुखार जैसा ही हो सकता है।

जीका वायरस रोग मच्छर जनित एक रोग है, जो एडीज मच्छरों द्वारा फैलता है। यह मच्छर डेंगू, चिकनगुनिया और पीला बुखार भी फैलाता है।

यह आमतौर पर दिन में काटता है। इसे आमतौर पर वयस्कों में कम गंभीरता वाली बीमारी माना जाता है। इसके इलाज के लिए किसी विशेष उपचार की आवश्यकता नहीं होती।

इसके सामान्य लक्षणों में हल्का बुखार, चकत्ते, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द तथा पलक के नीचे सूजन शामिल है। ये लक्षण आमतौर पर 2-7 दिनों तक रहते हैं।

पुणे के मणिपाल अस्पताल में कंसल्टेंट इंटरनल मेडिसिन डॉ. सुरुचि मांडरेकर ने आईएएनएस को बताया, “लगभग 80 प्रतिशत मामलों में लक्षण नहीं दिखाई देते।”

डॉक्टर ने कहा, दूसरी ओर इसमें डेंगू बुखार जैसे लक्षण दिखाई देते है। इसमें बुखार, लाल आंखें, जोड़ों में दर्द, सिरदर्द और एलर्जी शामिल हो सकती हैं।

पुणे के डीपीयू सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में आपातकालीन विभाग के सलाहकार और प्रभारी डॉ. दिग्विजय अडके ने कहा, “डेंगू की तरह ही जीका वायरस के मामलों में वृद्धि के लिए मुख्य रूप से कई कारक जिम्मेदार हैं। इनमें मौसम में अचानक बदलाव, नालियों का जाम होना, आसपास पानी जमा होना आदि शामिल हैं।”

इस बीच डॉ. सुरुचि ने बताया कि जीका वायरस का संक्रमण गर्भावस्था के दौरान चिंता का विषय है। क्योंकि यह कुछ शिशुओं में माइक्रोसेफेली और अन्य मस्तिष्क विकृतियों का कारण बन सकता है।

वयस्कों में इसे गिलियन-बैरे सिंड्रोम (जीबीएस) से जोड़ा गया है और यह मानव श्वान कोशिकाओं को प्रभावित करने के लिए जाना जाता है।

डॉ. सुरुचि ने कहा, ” इसमें मच्छरों की रोकथाम करना बेहद जरूरी है। हालांकि अभी तक इसका कोई टीका नहीं है, लेकिन डॉक्टरों ने मच्छरों से बचने के लिए मच्छरों को दूर रखने, शरीर के अधिकांश हिस्से को कपड़ों से ढकने, मच्छरदानी लगाने और जहां मच्छर पनपते हैं, वहां पानी जमा होने से बचने जैसे उपायों की सलाह दी है।”

डॉ. दिग्विजय ने आईएएनएस से कहा, “हाथों को नियमित रूप से धोने के साथ अच्‍छा भोजन लें। अपने दैनिक आहार में पोषक तत्वों से भरपूर फल और सब्जियों को शामिल करने से आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। इससे वेक्टर जनित बीमारियों से लड़ने में मदद मिलेगी।”

–आईएएनएस

एमकेएस/सीबीटी

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