'वुमानिया' पहल से जीईएम प्लेटफॉर्म से जुड़े 2.1 लाख महिलाओं के नेतृत्व वाले एमएसई, 13.7 लाख ऑर्डर्स मिले


नई दिल्ली, 10 अप्रैल (आईएएनएस)। ‘वुमानिया’ पहल से वित्त वर्ष 26 में सरकारी-ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) पर 2.1 लाख से ज्यादा महिलाओं के नेतृत्व वाले सूक्ष्म और लधु उद्यम (एमएसई) ने पंजीकरण किया है और उन्हें 13.7 लाख ऑर्डर्स मिले हैं। यह जानकारी शुक्रवार को सरकार की ओर से दी गई।

आधिकारिक बयान के अनुसार, महिला के नेतृत्व वाले लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसई) को 28,000 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य के कॉन्ट्रैक्ट दिए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में 27.60 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

कार्यक्रम के लाभार्थियों ने वित्त वर्ष 2026 में जीईएम के कुल ऑर्डर का 5.6 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त किया, जो निर्धारित 3 प्रतिशत के खरीद लक्ष्य से अधिक है।

इस पहल से महिला उद्यमी और स्वयं सहायता समूह जेईएम प्लेटफॉर्म के माध्यम से सीधे सरकारी खरीदारों को अपना सामान बेच सकेंगे।

यह योजना हस्तशिल्प, हथकरघा, जूट, नारियल, गृह सज्जा और कार्यालय साज-सज्जा जैसी निर्दिष्ट श्रेणियों की खरीद को कवर करती है।

बयान में कहा गया कि जमीनी स्तर पर, जिला प्रशासन, उद्यम सहायता केंद्र और प्रशिक्षण संस्थान विक्रेताओं की तत्परता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, प्रशिक्षण कार्यक्रम और उत्पाद सूची कार्यशालाएं आयोजित की जाती हैं।

जेईएम पर यह पहल मौजूदा उत्पादन क्षमताओं को औपचारिक, टिकाऊ उद्यम भागीदारी में परिवर्तित करती है।

बयान में कहा गया है, “जैसे-जैसे अधिक महिलाएं दृश्यता प्राप्त करती हैं, क्षमता निर्माण करती हैं और सरकारी खरीदारों से जुड़ती हैं, वुमनिया न केवल एक खरीद पहल बन जाती है, बल्कि अधिक आर्थिक स्वतंत्रता और व्यापक प्रतिनिधित्व का मार्ग भी बन जाती है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सार्वजनिक खरीद समाज के बेहतर वर्ग की क्षमताओं और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करती है।”

महिला नेतृत्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों की डिजिटल ऑनबोर्डिंग उद्यम सत्यापन और आवश्यक दस्तावेजीकरण के माध्यम से की जाता है, जबकि उत्पाद सूची में परिभाषित तकनीकी विशिष्टताओं के साथ एकसमान कैटलॉग टेम्पलेट का पालन किया जाता है ताकि खरीदार का मूल्यांकन आसान हो सके।

बोली लगाना, ऑर्डर देना, स्वीकृति, बिलिंग और भुगतान आदि सहित सभी खरीद गतिविधियां डिजिटल रूप से की जाती हैं, जिससे मध्यस्थों पर निर्भरता कम होती है और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों और सरकारी खरीदारों के बीच सीधा संपर्क स्थापित होता है।

–आईएएनएस

एबीएस/


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