लॉन्च के 5 महीने के भीतर आधार ऐप के डाउनलोड 3.1 करोड़ के पार, 40 लाख लोगों ने मोबाइल नंबर किया अपडेट

नई दिल्ली, 22 जून (आईएएनएस)। सरकार ने सोमवार को बताया कि नया आधार ऐप लॉन्च होने के पांच महीने से भी कम समय में 3.1 करोड़ डाउनलोड का आंकड़ा पार कर चुका है। देश भर में लोगों के बीच इस ऐप को तेजी से स्वीकार किया जा रहा है।
आईटी मंत्रालय ने बताया कि अब तक लगभग 40 लाख लोगों ने नए आधार ऐप के जरिए अपना मोबाइल नंबर अपडेट किया है। वहीं करीब 8.5 लाख लोगों ने इस ऐप का उपयोग कर अपना पता अपडेट कराया है।
मंत्रालय ने कहा कि ऐप को मिल रही बढ़ती लोकप्रियता इस बात का संकेत है कि लोग अब घर बैठे डिजिटल सेवाओं पर अधिक भरोसा कर रहे हैं।
नया आधार ऐप एंड्रॉयड और एप्पल आईओएस, दोनों प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध है।
लोगों की जिंदगी को आसान बनाने के उद्देश्य से तैयार किए गए इस ऐप के जरिए मोबाइल नंबर अपडेट, पता अपडेट और कई अन्य सेवाएं सीधे स्मार्टफोन से प्राप्त की जा सकती हैं। यह ऐप आधार धारकों को अपनी पहचान दिखाने, साझा करने और सत्यापित करने का सुविधाजनक और गोपनीयता-केंद्रित माध्यम प्रदान करता है।
इस ऐप में कई उपयोगी सुविधाएं दी गई हैं, जिनमें एक क्लिक में बायोमेट्रिक लॉक और अनलॉक, उपस्थिति प्रमाण के लिए फेस वेरिफिकेशन, ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री और संपर्क जानकारी साझा करने के लिए क्यूआर-आधारित एडिटेबल कॉन्टैक्ट कार्ड जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, उपयोगकर्ता ई-आधार डाउनलोड कर सकते हैं और आधार सेवा केंद्र (एएसके) में जाने के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट भी आसानी से बुक कर सकते हैं।
आधार ऐप का उपयोग कई वास्तविक जीवन की सेवाओं में किया जा सकता है, जिनमें ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटी (ओवीएसई) के क्यूआर कोड को स्कैन करके होटल में चेक-इन करना भी शामिल है।
यह ऐप अस्पताल में भर्ती, विजिटर मैनेजमेंट, कार्यक्रमों में प्रवेश, गिग वर्कर्स की पहचान सत्यापन और विभिन्न सेवा साझेदारों की पहचान जांच जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध कराता है।
सरकार ने हाल ही में बताया था कि आधार-आधारित ऑफलाइन वेरिफिकेशन व्यवस्था शुरू होने के मात्र तीन महीनों के भीतर कम से कम 100 संस्थाओं को ऑफलाइन वेरिफिकेशन सीकिंग एंटिटी (ओवीएसई) के रूप में जोड़ा जा चुका है।
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) द्वारा हासिल की गई यह उपलब्धि सुरक्षित, सहमति-आधारित और पूरी तरह पेपरलेस पहचान सत्यापन व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
इस व्यवस्था के तहत आधार सत्यापन के लिए केंद्रीय डाटाबेस तक रियल-टाइम पहुंच की आवश्यकता नहीं होती, जिससे उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता और सुरक्षा को और मजबूती मिलती है।
–आईएएनएस
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