बंगाल में एसआईआर को लेकर पक्ष-विपक्ष आमने-सामने, नेताओं के बीच जुबानी जंग

नई दिल्ली, 29 नवंबर (आईएएनएस)। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) शासित पश्चिम बंगाल में एसआईआर का मुद्दा गर्माया हुआ है, जहां एक ओर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के नेताओं ने इस प्रक्रिया को जरूरी बताया, वहीं दूसरी ओर देश की विपक्षी पार्टियों ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाया।
जनता दल (यूनाइटेड) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, “एसआईआर पर जो लोग विवाद कर रहे हैं, वह चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था के प्रति अनादर का भाव दिखा रहे हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने जब साफ कर दिया, तो उसपर सवाल उठाना यह दिखाता है कि विपक्ष को संवैधानिक संस्थाओं पर भरोसा नहीं है। विपक्ष के लिए एसआईआर सिर्फ बहाना है; उनका असली मकसद विकास के मुद्दे को छिपाना है।”
जेडीयू विधायक नागेंद्र चंद्रवंशी ने कहा, “वोटर लिस्ट में समय-समय पर बदलाव होना चाहिए, और यह पहले भी रेगुलर होता रहा है। एसआईआर में कोई कमी नहीं है, मरे हुए लोगों और जो अब यहां नहीं रहते, उनके नाम हटाने का प्रोसेस चल रहा है। अगर कोई यहां का रहने वाला है, तो उसे रेजिडेंस सर्टिफिकेट या दूसरा वैलिड डॉक्यूमेंट जमा करना चाहिए। वोटर लिस्ट में बदलाव रेगुलर होता रहा है, और जो लोग हंगामा कर रहे हैं, वे बेवजह ऐसा कर रहे हैं।”
कांग्रेस प्रवक्ता सचिन सावंत ने एसआईआर के समय पर सवाल उठाते हुए कहा, “एसआईआर प्रोसेस दो साल पहले शुरू हो जाना चाहिए था, लेकिन वे इसे सिर्फ चार महीने में जल्दी करने की कोशिश कर रहे हैं। उनकी सोच डेमोक्रेसी को कमजोर करने की है। वे सिर्फ अपने सपोर्टर्स के वोट रखना चाहते हैं और जो उनका विरोध करते हैं उन्हें हटाना चाहते हैं।”
कांग्रेस सांसद मनोज कुमार ने कहा, “एसआईआर के कारण अठारह से उन्नीस लोग मर गए हैं, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उनके बच्चों, उनकी पत्नी, या उनके माता-पिता की देखभाल कौन करेगा? अब उनके परिवार का गुजारा कौन करेगा? आप मुझे बताइए। कोई भी, यहां तक कि अधिकारी भी, इस बारे में बात नहीं कर रहे हैं।”
कांग्रेस नेता हसन दलवई ने कहा कि एसआईआर में वोट चोरी का बड़ा मामला है। चुनाव आयुक्त निर्देशों पर काम करते दिखते हैं, वे पीएम मोदी और अमित शाह के निर्देशों का पालन करते हैं। एसआईआर एक बहुत बड़ा घोटाला है।
–आईएएनएस
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