वक्फ संशोधन विधेयक देश के मुस्लिम विरोधी माहौल का हिस्सा : सुबोधकांत सहाय


रायपुर, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। लोकसभा में बुधवार को वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया गया। कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोध कांत सहाय ने इसे पिछले 10 साल से चल रहे मुस्लिम विरोधी माहौल का हिस्सा बताया।

आईएएनएस से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यह विधेयक वक्फ बोर्ड के कामकाज में बुनियादी बदलाव कर रहा है, जिसमें बोर्ड अब केवल मुस्लिम समुदाय का हिस्सा नहीं रहेगा, बल्कि इसमें हिंदू और अन्य धर्मों के लोग भी शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि वक्फ एक इस्लामी परंपरा है और इसमें हिंदू लोगों को शामिल करने का कोई औचित्य नहीं है, क्योंकि यह एक धार्मिक और इस्लामी व्यवस्था है, जिसमें जमीन का दान खुदा के नाम पर किया जाता है।

उन्होंने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वक्फ बोर्ड का पूरा उद्देश्य मुस्लिम समाज की परंपरा को बनाए रखना है, और इसमें बाहरी लोगों को शामिल करना उसकी स्वायत्तता और धार्मिक पहचान को कमजोर करने जैसा है। उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव समझ से परे है, और यह सवाल उठाया कि मुस्लिम समाज की परंपरा और उनके धार्मिक ढांचे में इस तरह के बदलाव की आवश्यकता क्यों महसूस की जा रही है।

सुबोध कांत सहाय ने इस विधेयक को एक सोची-समझी रणनीति के तहत प्रस्तुत किया गया कदम करार दिया। उनका आरोप था कि मोदी सरकार पिछले 10 साल से मुस्लिम विरोधी रुख अपनाए हुए है, और यह विधेयक उसी का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विधेयक के माध्यम से मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। उनका यह मानना था कि यह पूरी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में उलझेगी और समाज में और अधिक असहमति पैदा करेगी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि यह विधेयक उस परिभाषा के खिलाफ है जो मुस्लिम समुदाय के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए बनी थी, और यह न केवल मुस्लिम समाज को बल्कि समग्र भारतीय समाज को प्रभावित करेगा।

–आईएएनएस

पीएसएम/एकेजे


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