वक्फ संशोधन विधेयक पूरी तरह से असंवैधानिक, जाना चाहिए कोर्ट : रामगोपाल यादव


नई दिल्ली, 4 अप्रैल (आईएएनएस)। वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के सांसद रामगोपाल यादव ने इस विधेयक को पूरी तरह असंवैधानिक करार देते हुए कहा कि इसके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए।

रामगोपाल यादव ने आरोप लगाया कि राष्ट्रपति ने अब तक विधेयक को मंजूरी नहीं दी है, लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कलेक्टरों को अवैध संपत्तियों को जब्त करने का आदेश पहले ही जारी कर दिया है। पूरा विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट था और आगे भी एकजुट रहेगा।

सपा सांसद ने संसद सत्र के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, “जब तक सत्र चलता है, कुछ अच्छे काम होते हैं। लोगों के मुद्दे उठाए जाते हैं। कभी उनका समाधान होता है, कभी नहीं, लेकिन कम से कम समस्याओं को सामने लाया जाता है और उन पर चर्चा होती है। सरकारी विधेयक पेश किए जाते हैं, जिनमें से कुछ उचित होते हैं, तो कुछ में विपक्ष और जनता को कमियां नजर आती हैं, जिन्हें उजागर किया जाता है।”

दूसरी ओर, लोकसभा और राज्यसभा से पारित हो चुके वक्फ संशोधन विधेयक को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐतिहासिक कदम बताया है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक का पारित होना सामाजिक-आर्थिक न्याय, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण क्षण है। पीएम मोदी ने इसे उन लोगों के लिए विशेष रूप से लाभकारी बताया, जो लंबे समय से हाशिए पर रहे हैं और अवसरों से वंचित थे।

प्रधानमंत्री ने सभी सांसदों का आभार जताया, जिन्होंने संसदीय और समिति की चर्चाओं में हिस्सा लिया और अपने सुझावों से इन विधेयकों को मजबूत बनाया। उन्होंने उन लोगों का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने संसदीय समिति को अपने मूल्यवान सुझाव भेजे। पीएम ने कहा, “एक बार फिर व्यापक बहस और संवाद का महत्व साबित हुआ है।”

उल्लेखनीय है कि वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 राज्यसभा में पारित हो गया है। इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई है। ऊपरी सदन में गुरुवार को पेश होने के बाद करीब 12 घंटे चली चर्चा के उपरांत गुरुवार-शुक्रवार की रात को विधेयक पारित हुआ। इसके पक्ष में 128 और विरोध में 95 मत पड़े। लोकसभा पहले ही इसे मंजूरी दे चुकी थी। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ अधिनियम में संशोधन के जरिए वक्फ बोर्ड के ढांचे में बदलाव और कानूनी विवादों को कम करना है।

–आईएएनएस

एकेएस/एकेजे


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