‘विकसित भारत’ की दिशा में दूरदर्शी रोडमैप, पूर्वोत्तर के मुख्यमंत्रियों ने केंद्रीय बजट की सराहना की


गुवाहाटी, 1 फरवरी (आईएएनएस)। पूर्वोत्तर राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कई मंत्रियों ने रविवार को केंद्रीय बजट 2026-27 की सराहना करते हुए इसे वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर देश को ले जाने वाला दूरदर्शी रोडमैप बताया।

नेताओं ने कहा कि यह बजट समावेशी विकास, बुनियादी ढांचे के विस्तार, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय सशक्तिकरण पर केंद्रित एक स्पष्ट 25 वर्षीय खाका प्रस्तुत करता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ‘विकसित भारत बजट 2026’ के लिए बधाई देते हुए असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि यह बजट भारत की वैश्विक आकांक्षाओं और जमीनी विकास के बीच संतुलन साधता है।

सरमा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “इस सुधारोन्मुख बजट से असम और पूर्वी क्षेत्र को सार्थक लाभ मिलेगा।”

त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने भी प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को बधाई देते हुए कहा कि यह बजट भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में एक दूरदर्शी मार्गदर्शिका है।

उन्होंने एक्स पर लिखा, “उत्पादन और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे से लेकर स्वास्थ्य और पर्यटन तक; ग्रामीण क्षेत्रों के सशक्तिकरण से लेकर अत्याधुनिक एआई को अपनाने तक; आधुनिक खेल परिसरों से लेकर पवित्र तीर्थ स्थलों तक, यह बजट देश के हर गांव, कस्बे और शहर में युवाओं, महिलाओं और किसानों की आकांक्षाओं को नई ऊर्जा देता है।”

नगालैंड के उच्च शिक्षा और पर्यटन मंत्री टेमजेन इम्ना अलॉन्ग ने कहा कि केंद्रीय बजट इस बात का मजबूत संकेत देता है कि सेवाएं, शिक्षा और पर्यटन भारत के अगले विकास चरण के केंद्र में होंगे, जिसका नगालैंड से सीधा संबंध है।

उन्होंने कहा कि प्रमुख कॉरिडोरों के साथ यूनिवर्सिटी टाउनशिप स्थापित करने और ‘शिक्षा से रोजगार एवं उद्यम’ पर एक उच्चस्तरीय स्थायी समिति के गठन का प्रस्ताव उच्च शिक्षा को रोजगारपरक और उद्यमिता से जोड़ने की आवश्यकता को रेखांकित करता है, जिस दिशा में नगालैंड पहले ही सुधार शुरू कर चुका है।

पर्यटन क्षेत्र के लिए अलॉन्ग ने नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट को राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान में उन्नत करने, 10,000 प्रमाणित टूरिस्ट गाइड्स को प्रशिक्षित करने के पायलट कार्यक्रम और नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड के गठन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटन का पेशेवरकरण होगा और स्थानीय युवाओं के लिए नए अवसर सृजित होंगे।

मिजोरम के पर्यटन मंत्री लालंगहिंगलोवा हमार ने कहा कि बजट पर्यटन को रोजगार सृजन, सांस्कृतिक संरक्षण और सतत क्षेत्रीय विकास के केंद्र में रखता है, जो मिजोरम की प्राथमिकताओं के अनुरूप है।

उन्होंने कहा कि पर्यावरण-संवेदनशील पर्यटन, पेशेवर कौशल विकास, आतिथ्य शिक्षा और डिजिटल दस्तावेजीकरण पर जोर पर्यटन को संख्या आधारित मॉडल से मूल्य और अनुभव आधारित मॉडल की ओर ले जाने का संकेत है।

हमार ने 12.2 लाख करोड़ रुपये के सार्वजनिक पूंजीगत व्यय में वृद्धि का स्वागत करते हुए कहा कि इससे अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आंतरिक पर्यटन सर्किटों तक पहुंच आसान बनेगी।

अरुणाचल प्रदेश के पर्यटन, शिक्षा, ग्रामीण कार्य और संसदीय कार्य मंत्री पासांग दोरजी सोना ने कहा कि केंद्रीय बजट भारत की विविधता की परिपक्व समझ को दर्शाता है, जिसमें क्षमता निर्माण, कनेक्टिविटी और सांस्कृतिक निरंतरता पर ध्यान दिया गया है।

उन्होंने कहा कि ‘पूर्वोदय’ पर जोर, निरंतर पूंजीगत व्यय और 16वें वित्त आयोग के तहत बेहतर वित्तीय हस्तांतरण अरुणाचल प्रदेश में विकेंद्रीकृत और दीर्घकालिक विकास की मजबूत नींव रखता है।

सोना ने कहा कि यह बजट कल्याण से आगे बढ़कर क्षमता निर्माण की ओर बदलाव को दर्शाता है। यूनिवर्सिटी टाउनशिप, जिला स्तर पर बालिका छात्रावास और शिक्षा से रोजगार स्थायी समिति जैसी पहलें दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं।

उन्होंने नेशनल डेस्टिनेशन डिजिटल नॉलेज ग्रिड के जरिए विरासत के डिजिटल दस्तावेजीकरण, अगरवुड जैसी उच्च मूल्य वाली कृषि को समर्थन, ‘लखपति दीदी’ ढांचे के तहत एसएचई मार्ट्स के विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी को ग्रामीण आजीविका और महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने वाला बताया।

प्रस्तावित बौद्ध सर्किट योजना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इससे अरुणाचल प्रदेश की भारत और एशिया के बीच सभ्यतागत सेतु की भूमिका और मजबूत होगी।

पूर्वोत्तर के नेताओं ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 शिक्षा, बुनियादी ढांचे, सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक अवसरों को जोड़ने वाला संतुलित और भविष्य के लिए तैयार रोडमैप है, जो इस क्षेत्र को ‘विकसित भारत’ का सक्रिय सहभागी बनाएगा।

–आईएएनएस

डीएससी


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