वीएचपी का एआईएमआईएम पर तंज, 'जन्नत में शराब चाहिए तो यहां पर बंद की मांग क्यों?'


नई दिल्ली, 19 फरवरी (आईएएनएस)। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) द्वारा रमजान माह में शराब की दुकानें बंद रखने की अपील की गई, जिसे लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज है। इस बीच विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने गुरुवार को अपनी प्रतिक्रिया दी।

वीएचपी प्रवक्ता विनोद बंसल ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, “यह पार्टी पहले तय कर ले कि जब वे जीते-जी शराब नहीं पीने की बात करते हैं, तो वे मरने के बाद जन्नत में शराब की नदियों की बात क्यों करते हैं। वहां पर उन्हें शराब, शबाब और 72 हुर्रे भी चाहिए। उसके लिए वे मुस्लिम युवाओं को बहला-फुसलाकर उन्हें जिहाद के नाम पर आतंकवाद के राह पर धकेल देते हैं। वे पहले बताएं कि उन्हें जन्नत में शराब चाहिए कि नहीं। अगर जन्नत में शराब चाहिए तो यहां पर क्यों बंद करवा रहे हैं? वे पहले इस मुद्दे को तय करें, उसके बाद शराब बंद करवाने की बात करें।”

उन्होंने तेलंगाना के तर्ज पर महाराष्ट्र में भी रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों के लिए दफ्तरों में छुट्टी देने की चर्चा पर कहा, “जैसा कि मैंने पहले तेलंगाना सरकार के फैसले के बारे में कहा था, ऐसे बयान देश को और बंटवारे की तरफ धकेलते हैं। सांप्रदायिक आधार पर किसी भी तरह का तुष्टीकरण ठीक नहीं है, और तेलंगाना सरकार को भी इससे बचना चाहिए। महाराष्ट्र में तो यह मुमकिन भी नहीं है। अबू आजमी जो रमजान के वक्त मुस्लिम कर्मचारियों को छुट्टी देने की बात कर रहे हैं, वे तो आतंकियों के अब्बू जान हैं, जिस कारण वे ऐसी बातें करते हैं। उन्हें ऐसे वक्तव्य से पहले थोड़ा सोचना चाहिए।”

विनोद बंसल ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के बयान पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “मुस्लिम नेताओं को युवाओं को नेक राह पर चलने की प्रेरणा देनी चाहिए, लेकिन वे हिंसा की बात कर रहे हैं। मदनी छोटे से शब्द ‘घर वापसी’ को लेकर इतने परेशान हो गए कि उन्हें मां का दूध याद आ गया। जो कहते हैं कि इस्लाम को मानने वाले किसी से डरते नहीं हैं, वे ‘घर वापसी’ जैसे छोटे से शब्द से डर गए।”

–आईएएनएस

एससीएच/डीकेपी


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