गुजरात : केंद्रीय बजट पर टिकी वापी के उद्योगों की नजर, एमएसएमई और फार्मा सेक्टर को राहत की आस


वापी, 23 जनवरी (आईएएनएस)। आने वाले दिनों में केंद्रीय बजट पेश किया जाने वाला है। ऐसे में देशभर के उद्योगों को इस बार केंद्रीय बजट से विशेष उम्मीदें हैं। गुजरात की औद्योगिक नगरी वापी के उद्योग भी इस बार केंद्रीय बजट की बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं।

एक्सपोर्ट के माध्यम से करोड़ों रुपए का विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाले वापी के उद्योग वर्तमान समय में ट्रंप टैरिफ के कारण कठिन दौर से गुजर रहे हैं। ऐसे में इस बार सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले बजट में यहां के उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीदें जताई जा रही हैं।

एशिया की अग्रणी औद्योगिक नगरी में शामिल वापी और आसपास के क्षेत्रों में छोटे-बड़े 10 हजार से अधिक उद्योग-धंधे सक्रिय हैं। वापी को केमिकल, फार्मा और पेपर इंडस्ट्री का हब माना जाता है।

यहां के उद्योग देश-विदेश में एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट से जुड़े हुए हैं, जिस कारण केंद्रीय बजट पर इन उद्योगों का व्यापार काफी हद तक निर्भर रहता है। इसी वजह से इस बार के केंद्रीय बजट से भी वापी और आसपास के उद्योगों को बड़ी उम्मीदें हैं।

गौरतलब है कि वर्तमान समय में ट्रंप टैरिफ के कारण देश और दुनिया के उद्योगों में अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। इसका असर बीते कुछ समय से वापी के उद्योगों पर भी देखने को मिल रहा है। ऐसे हालात में केंद्रीय बजट से वापी के उद्योग सरकार से विशेष राहत की अपेक्षा कर रहे हैं।

वापी इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश पटेल ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि वापी मुख्य रूप से एमएसएमई और एसएमई आधारित औद्योगिक क्षेत्र है। इस बार के केंद्रीय बजट में दुनियाभर में ट्रंप टैरिफ के चलते प्रभावित हुए निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार से एक उद्योग-फ्रेंडली बजट की अपेक्षा है, जिससे छोटे और मध्यम उद्योगों को मजबूती मिल सके।

उद्योगपति प्रकाश भद्रा ने कहा कि वापी की केमिकल और फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री रिसर्च एंड डेवलपमेंट (आरएंडडी) पर खासा भरोसा करती है। उन्होंने बताया कि पहले आरएंडडी पर 200 प्रतिशत एक्सपेंडिचर रिबेट मिलता था, जिसे पिछले दो वर्षों से बंद कर दिया गया है।

उन्होंने आशा जताई कि इस बजट में इस प्रावधान को फिर से जोड़ा जाएगा, जिससे नए उद्योग रिसर्च और आरएंडडी के क्षेत्र में आगे बढ़ सकें और नए उत्पाद विकसित हो सकें।

उन्होंने यह भी कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस भविष्य का अहम टूल है, ऐसे में जो इंडस्ट्री इसमें निवेश कर रही है, उसे प्रोत्साहन देने के लिए इंसेंटिव दिए जाने चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि टैरिफ और चीन फैक्टर के कारण एमएसएमई उद्योग का उत्पादन प्रभावित हुआ है, इसलिए इस क्षेत्र को सब्सिडी और इंसेंटिव देना बेहद जरूरी है।

वापी में केमिकल, फार्मा, पेपर और इंजीनियरिंग समेत कई प्रकार के उद्योग स्थित हैं। वापी को फार्मा इंडस्ट्री का भी प्रमुख हब माना जाता है। यह महत्वपूर्ण है कि भारत विश्व में फार्मा इंडस्ट्री में अग्रणी हिस्सेदारी रखता है।

ऐसे में टैरिफ की सबसे ज्यादा मार इसी उद्योग पर पड़ी है। जब देश आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रहा है, तब वैश्विक बाजार और चीन जैसी प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुकाबले में टिके रहने के लिए फार्मा इंडस्ट्री को भी इस बजट से विशेष उम्मीदें हैं।

इसके साथ ही इस बार के बजट में उद्योगों के विकास के लिए सरकार की एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट नीतियों में और अधिक सरलीकरण व पारदर्शिता लाने तथा वन विंडो सिस्टम जैसी व्यवस्था लागू किए जाने की भी मांग की जा रही है।

अग्रणी उद्योगपति कमल वशी ने कहा कि फार्मास्‍युटिकल इंडस्ट्री हैं, नए उद्योग भी आ रहे हैं। सरकार से उम्‍मीद है कि इस बजट में डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्‍युटिकल या फार्मास्‍युटिकल मिनिस्ट्री बनाए। इससे इंडस्ट्री को बहुत ज्‍यादा फायदा हो सकता है। एक्‍सपोर्ट में भारत पहली पोजीशन में है। ऐसे देश में अलग से डिपार्टमेंट ऑफ फार्मास्‍युटिकल नहीं है। जैसे भारत अलग-अलग देशों से बिजनेस डील कर रहा है, उसमें फार्मास्‍युटिकल को रिप्रेजेंटेशन मिलेगा और एक्‍सपोर्ट का दायरा बढ़ सकता है। वहीं, जीएसटी रिफंड की प्रक्रिया थोड़ी जटिल है, इसको आसान बनाने की जरूरत है।

–आईएएनएस

एएसएच/एबीएम


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