हाइपरटेंशन की वजह अनहेल्दी लाइफस्टाइल, 'साइलेंट किलर' को इन आदतों से दें मात


नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। अनहेल्दी लाइफस्टाइल की वजह से हाइपरटेंशन या उच्च रक्तचाप के मरीजों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। साथ ही भोजन में ज्यादा नमक, जंक फूड, तनाव, व्यायाम की कमी, मोटापा, तंबाकू और शराब का सेवन ‘साइलेंट किलर’ की बड़ी वजह बनते हैं।

नेशनल हेल्थ मिशन ने हाइपरटेंशन से अलर्ट करते हुए इसे ‘साइलेंट किलर’ करार दिया। यह बीमारी बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाती है और जानलेवा साबित हो सकती है। हाइपरटेंशन दिल, किडनी और दिमाग को नुकसान पहुंचाता है। हालांकि, संतुलित आहार, व्यायाम और नियमित जांच से इसे नियंत्रित या रोका जा सकता है।

एक्सपर्ट के अनुसार, हाइपरटेंशन का सबसे आम और प्रमुख कारण आज की अस्वस्थ जीवनशैली है। नेशनल हेल्थ मिशन के मुताबिक, हाइपरटेंशन को नियंत्रित करने और इससे बचने के लिए जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव बहुत महत्वपूर्ण हैं। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और आंखों की समस्याओं का कारण बन सकता है।

हाइपरटेंशन के प्रमुख कारणों में ज्यादा नमक का सेवन शामिल है, रोजाना ज्यादा नमक खाने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है। प्रोसेस्ड फूड, चिप्स, नमकीन, अचार और बाहर का खाना अक्सर ज्यादा नमक से भरे होते हैं। इसके साथ ही लगातार काम का दबाव, पारिवारिक समस्याएं या मानसिक तनाव लंबे समय तक रहने पर बीपी बढ़ा देता है। दिनभर बैठे रहना, व्यायाम न करना और मोटापा भी इसे बढ़ावा देते हैं।

इसके अलावा, जंक और प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन, तंबाकू और शराब के सेवन से धमनियों को नुकसान पहुंचता है और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ता है। यही नहीं, अतिरिक्त वजन, खासकर पेट के आसपास की चर्बी, हृदय पर दबाव डालती है और बीपी बढ़ाती है।

नेशनल हेल्थ मिशन ने बताया कि हाइपरटेंशन से बचाव के लिए नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच करवाना, संतुलित और कम नमक वाला आहार लेना, रोजाना कम से कम 30 मिनट व्यायाम या पैदल चलना, तनाव कम करने के लिए योग-मेडिटेशन करना, तंबाकू और शराब से दूर रहने के साथ ही वजन को नियंत्रित रखना जरूरी है।

वहीं, डॉक्टरों की सलाह है कि 18 साल से ऊपर हर व्यक्ति को साल में कम से कम एक बार बीपी चेक करवाना चाहिए। अगर परिवार में किसी को हाइपरटेंशन रहा है तो जांच और ज्यादा जरूरी है। समय पर पता चल जाए तो दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव कर इसे आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है।

–आईएएनएस

एमटी/एबीएम


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