पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की कार्रवाई में बलूचिस्तान में दो नागरिकों की मौत

क्वेटा, 5 फरवरी (आईएएनएस)। बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर दो बलूच नागरिकों की न्यायिक प्रक्रिया के बिना हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने गुरुवार को यह दावा किया। यह घटनाएं ऐसे समय पर हुई हैं, जब पूरे प्रांत में लक्षित हत्याओं और जबरन गुमशुदगी के मामलों में लगातार बढ़ोतरी देखी जा रही है।
बलूच नेशनल मूवमेंट (बीएनएम) के मानवाधिकार विभाग ‘पांक’ के अनुसार, केच जिले के तुर्बत शहर निवासी बलाच खालिद की बुधवार को पाकिस्तान समर्थित एक तथाकथित ‘डेथ स्क्वॉड’ ने गोली मारकर हत्या कर दी। पांक ने बताया कि बलाच खालिद इससे पहले कई बार जबरन गायब किए जा चुके थे।
स्थानीय सूत्रों के हवाले से पांक ने कहा कि हथियारबंद मोटरसाइकिल सवारों ने, जिनका संबंध डेथ स्क्वॉड से बताया जा रहा है, बलाच पर अंधाधुंध फायरिंग की और मौके से फरार हो गए।
मानवाधिकार संगठन के अनुसार, बलाच खालिद को पहली बार 25 अक्टूबर 2023 की रात अगवा किया गया था और 25 दिन बाद 15 नवंबर 2023 को रिहा किया गया। इसके कुछ महीनों बाद उन्हें दोबारा जबरन गायब कर दिया गया, फिर पाकिस्तान के काउंटर टेररिज्म डिपार्टमेंट (सीटीडी) को सौंप दिया गया और कई महीनों की हिरासत के बाद रिहा किया गया।
पांक ने कहा, “अपनी हत्या से पहले बलाच कम से कम दो बार उसी डेथ स्क्वॉड द्वारा किए गए जानलेवा हमलों में बच चुके थे।”
इसके अलावा, पांक ने खुलासा किया कि 60 वर्षीय एक अन्य बलूच नागरिक बाबू अत्ता मोहम्मद बदिनी की 3 फरवरी को बलूचिस्तान के नुश्की जिले के किली काजी आबाद इलाके में पाकिस्तानी सेना की सीधी फायरिंग में मौत हो गई। संगठन के अनुसार, पाकिस्तानी बलों ने इलाके में गोलीबारी की, जिसमें उनकी जान चली गई।
पांक ने कहा, “यह घटना बलूचिस्तान में नागरिकों के खिलाफ घातक बल प्रयोग के लगातार जारी पैटर्न को दर्शाती है।”
मानवाधिकार संगठन ने अत्याचारों की ओर ध्यान दिलाते हुए यह भी बताया कि 3 फरवरी को क्वेटा के किली असगर आबाद, सरियाब कस्टम्स क्षेत्र से 15 वर्षीय छात्र हसनैन बलूच को पाकिस्तानी सेना ने जबरन गायब कर दिया।
पांक की हालिया वार्षिक मानवाधिकार रिपोर्ट “ए ईयर ऑफ रिप्रेशन: बलूचिस्तान 2025” के अनुसार, वर्ष 2025 के दौरान पूरे प्रांत में बड़े पैमाने पर मानवाधिकार उल्लंघन दर्ज किए गए। रिपोर्ट में 1,355 जबरन गुमशुदगी, 225 न्यायिक प्रक्रिया के बिना हत्याओं, नागरिक इलाकों पर बार-बार हवाई हमलों और शांतिपूर्ण नागरिक आंदोलनों को दबाने के लिए कानूनी व प्रशासनिक उपायों के दुरुपयोग का उल्लेख किया गया है।
रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि पीड़ित परिवारों और गवाहों की आवाज दबाने के लिए सूचना पर प्रतिबंध लगाए गए।
–आईएएनएस
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