ईरान युद्ध को लेकर आतंकवाद-रोधी प्रमुख के इस्तीफे के बाद तुलसी गबार्ड ने किया राष्ट्रपति ट्रंप का बचाव

वाशिंगटन, 18 मार्च (आईएएनएस)। अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस निदेशक तुलसी गबार्ड ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमला करने के फैसले का बचाव किया। यह तब हुआ जब आतंकवाद-रोधी संस्था के प्रमुख जो केंट ने विरोध में इस्तीफा दे दिया। इस युद्ध को लेकर प्रशासन से यह पहला उच्च-स्तरीय इस्तीफा था।
तुलसी गबार्ड ने अपने बयान में कहा कि डोनाल्ड ट्रंप को अमेरिकी जनता ने भारी बहुमत से राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ चुना है। उन्होंने कहा, “कमांडर-इन-चीफ के रूप में यह उनकी जिम्मेदारी है कि वे तय करें कि क्या तत्काल खतरा है और क्या नहीं, और क्या हमारे सैनिकों, अमेरिकी लोगों और हमारे देश की सुरक्षा व हिफाजत के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं या नहीं।”
राष्ट्रपति प्रशासन में सबसे ऊंचे पद पर मौजूद हिंदू अमेरिकी गबार्ड ने कहा कि यह फैसला खुफिया जानकारी के आकलन पर आधारित था। उन्होंने कहा, “नेशनल इंटेलिजेंस निदेशक का कार्यालय सभी खुफिया जानकारियों को समन्वित और एकीकृत करने में मदद करने के लिए जिम्मेदार है, ताकि राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ को उनके फैसलों के लिए सबसे अच्छी उपलब्ध जानकारी दी जा सके।”
गबार्ड ने कहा, “अपने सामने मौजूद सभी जानकारियों की सावधानीपूर्वक समीक्षा करने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि ईरान में मौजूद इस्लामी शासन हमारे लिए एक खतरा है। उन्होंने इसी निष्कर्ष के आधार पर कार्रवाई की।”
इससे पहले, जो केंट ने इस्तीफा देते हुए कहा, “काफी सोच-विचार के बाद मैंने आतंकवाद-रोधी संस्था के निदेशक पद से इस्तीफा देने का फैसला किया है।”
केंट ने सीधे तौर पर इस युद्ध के आधार को ही चुनौती दी। उन्होंने कहा, “मैं अपनी अंतरात्मा की आवाज पर ईरान में चल रहे इस युद्ध का समर्थन नहीं कर सकता। ईरान से हमारे देश को कोई खतरा नहीं था और यह साफ है कि हमने इजरायल और उसकी शक्तिशाली अमेरिकी लॉबी के दबाव में आकर यह युद्ध शुरू किया है।”
हालांकि, व्हाइट हाउस ने भी केंट के दावों को खारिज कर दिया। प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा, “इस पत्र में कई झूठे दावे किए गए हैं, लेकिन मैं विशेष रूप से एक दावे का जवाब देना चाहूंगी कि ‘ईरान से हमारे देश को कोई तत्काल खतरा नहीं था।’ यह वही झूठा दावा है जिसे डेमोक्रेट और उदारवादी मीडिया के कुछ लोग बार-बार दोहराते आ रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप के पास इस बात के मजबूत और ठोस सबूत थे कि ईरान सबसे पहले अमेरिका पर हमला करने वाला था। कैरोलिन लेविट ने कहा कि यह फैसला कई स्रोतों और कारकों से जुटाई गई खुफिया जानकारियों पर आधारित था।
इस्तीफे के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद केंट की आलोचना की। उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह अच्छी बात है कि वह अब प्रशासन से बाहर हैं, क्योंकि उन्होंने कहा था कि ईरान कोई खतरा नहीं है, जबकि हर देश यह मानता था कि ईरान एक खतरा है।”
ट्रंप ने आगे कहा, “मुझे हमेशा लगता था कि वह एक अच्छा इंसान है। लेकिन मुझे हमेशा यह भी लगता था कि वह सुरक्षा के मामले में कमजोर है। जब मैंने उनका बयान पढ़ा, तो मुझे एहसास हुआ कि यह अच्छा ही हुआ कि वह अब इस पद पर नहीं है, क्योंकि उन्होंने कहा कि ईरान कोई खतरा नहीं है, जबकि ईरान एक खतरा था।”
–आईएएनएस
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