अमीर लोग खुद गारंटी स्कीम छोड़ें तो गलत नहीं, कोई योजना बंद नहीं होगी : डीके शिवकुमार


बेंगलुरु, 26 फरवरी (आईएएनएस)। कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने गुरुवार को कहा कि अगर अमीर लोग अपनी मर्जी से राज्य की गारंटी स्कीम से बाहर निकलते हैं तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी प्रोग्राम को बंद नहीं करेगी।

वह विधान सौधा में मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा, “अगर अमीर लोग अपनी मर्जी से गारंटी स्कीम छोड़ देते हैं, तो इसमें कुछ भी गलत नहीं है। सरकारी कर्मचारियों और बड़ी आईटी कंपनियों में काम करने वालों ने हमें बताया है कि उन्हें गारंटी स्कीम के फायदों की जरूरत नहीं है।”

गारंटी स्कीमों के बंद होने की अटकलों पर जवाब देते हुए, शिवकुमार ने कहा कि किसी भी हालत में उन्हें रोकने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

उन्होंने कहा, “उदाहरण के लिए, कुछ मामलों में, गारंटी स्कीम का पैसा मरे हुए लोगों के नाम पर जमा कर दिया गया है। यहां तक कि राशन का चावल भी मरे हुए लोगों के नाम पर निकाला जा रहा है। हालांकि, गृह ज्योति स्कीम में यह समस्या नहीं आती है।”

उन्होंने कहा कि मरे हुए लोगों के नाम पर काफ़ी रकम निकाली गई है और इस तरह के गलत इस्तेमाल को रोकने की जरूरत पर जोर दिया।

उन्होंने कहा, “सरकार को मरे हुए लोगों की पहचान करने में मुश्किलें आ रही हैं, और इस समस्या को कैसे हल किया जाए, इस पर बातचीत चल रही है।” जब उनसे कुछ मंत्रियों की उस बात के बारे में पूछा गया जिसमें कहा गया था कि अमीर लोगों को गारंटी स्कीम से बाहर रहना चाहिए, तो शिवकुमार ने कहा कि कुछ बेनिफिशियरी ने खुद कहा है कि उन्हें ऐसे बेनिफिट्स की जरूरत नहीं है।

उन्होंने कहा, “कुछ अमीर लोगों ने कहा है कि उन्हें इन बेनिफिट्स की जरूरत नहीं है। उन्होंने 200 यूनिट फ्री बिजली के बारे में भी यही कहा है। हम इस मामले को रिव्यू कर रहे हैं।”

उन्होंने मीडिया से उनकी बात का गलत मतलब न निकालने की रिक्वेस्ट की।

उन्होंने कहा, “मैंने साफ कहा है कि किसी भी हालत में कोई भी गारंटी स्कीम बंद नहीं होगी। मुश्किलों के बावजूद, हम गारंटी स्कीम देना जारी रखे हुए हैं।”

शिवकुमार ने उन दावों को भी खारिज कर दिया कि गारंटी स्कीम पर खर्च की वजह से डेवलपमेंट के काम में रुकावट आ रही है।

उन्होंने कहा, “इस बजट में, हमारी सरकार कई डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स का ऐलान करेगी।”

–आईएएनएस

एससीएच


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