30 लाख रुपए प्रति वर्ष वेतन पाने वालों की टैक्स बेस में हिस्सेदारी 20 प्रतिशत के पार, 40-50 वर्ष आयु वर्ग सबसे आगे


नई दिल्ली, 7 जनवरी (आईएएनएस)। भारत में उच्च वेतन पाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इस कारण वेतन पाने वाले करदाताों में 30 लाख रुपए प्रति वर्ष कमाने वालों की संख्या 2025 में बढ़कर 23.34 प्रतिशत हो गई है, जो कि 2024 में 18.49 प्रतिशत थी। यह जानकारी बुधवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।

क्लियर टैक्स की ओर से जारी की गई वार्षिक रिपोर्ट ‘भारत ने 2025 में कैसे टैक्स भरा’ में बताया गया कि 40-50 आयु वर्ग के करीब 38 प्रतिशत लोगों को 30 लाख रुपए प्रति वर्ष से अधिक का वेतन मिल रहा है, जो कि इसे सबसे मजबूत आय अर्जित करने वाला और टैक्स में योगदान देने वाला वर्ग बनाता है।

यह ट्रेंड दिखाता है कि मिड-करियर के सालों में अनुभव और करियर की स्थिरता ज्यादा सैलरी में कैसे बदल जाती है।

इसी के साथ, रिपोर्ट में बताया गया है कि भारतीय जिस तरह से आय अर्जित करते हैं, उसमें एक बड़ा बदलाव आया है। टैक्स देने वाले अब सिर्फ सैलरी पर निर्भर नहीं हैं।

आईटीआर-3 और आईटीआर-2 में हुई वृद्धि दिखाती है कि बिजनेस, ट्रेडिंग और निवेश से आय में तेज इजाफा हुआ है और यह दिखाता है कि लोग अब केवल एक माध्यम से होने वाली आय पर निर्भर नहीं है और अपनी आय के स्रोतों में विविधता ला रहे हैं।

निवेश भी अब एक खास एक्टिविटी न रहकर एक आम फाइनेंशियल आदत बन गई है। आईटीआर-3 फाइल करने वाले अधिकतर करदाताओं ने कैपिटल गेन की जानकारी दी, जिससे पता चलता है कि इक्विटी मार्केट और ट्रेडिंग अब कई भारतीयों के लिए रेगुलर फाइनेंशियल प्लानिंग का हिस्सा बन गए हैं।

युवा भारतीय इन्वेस्टर माइंडसेट के साथ वर्कफोर्स में आ रहे हैं। 25 साल से कम उम्र के लोगों में टैक्स फाइलिंग में काफी बढ़ोतरी हुई है, और कई पहली बार फाइल करने वालों ने पहले ही कैपिटल गेन की जानकारी दी है।

25 से 35 साल के मिलेनियल्स इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहे हैं। एक्टिव इन्वेस्टिंग, ट्रेडिंग और कई इनकम सोर्स की वजह से कॉम्प्लेक्स टैक्स फाइलिंग में उनका सबसे बड़ा हिस्सा है।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि क्रिप्टो एसेट्स मेनस्ट्रीम इन्वेस्टमेंट के बजाय एक हाई-रिस्क ऐड-ऑन बने हुए हैं।

–आईएएनएस

एबीएस/


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